रिपोर्टर – ऐश कुमार साहू
सीजी भास्कर, 20 जून। तिल्दा क्षेत्र के गांवों में इन दिनों एक ही चर्चा सुनाई (Farmers Protest) दे रही है। चौपालों से लेकर खेत खलिहानों तक ग्रामीण अपने जल स्रोतों, खेती और आने वाले समय को लेकर चिंता जताते नजर आ रहे हैं। गांवों में लगातार बैठकों और जनसंपर्क का दौर चल रहा है, जिसके चलते माहौल धीरे धीरे आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
इसी बीच 22 जून को तिल्दा थाना घेराव की घोषणा ने पूरे इलाके में हलचल बढ़ा दी है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर अब एकजुट होकर आवाज उठाएंगे। इस प्रस्तावित आंदोलन में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी भी रहने वाली है, जिससे कार्यक्रम को लेकर लोगों के बीच उत्साह और चर्चा दोनों बढ़ गए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व में होगा आंदोलन Farmers Protest
क्षेत्र के किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों की विभिन्न मांगों को लेकर 22 जून को तिल्दा थाना घेराव का आयोजन किया जाएगा। आंदोलन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शामिल होंगे और उनके नेतृत्व में ग्रामीण अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
जल स्रोतों और खेती को लेकर चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में प्रस्तावित प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों से पर्यावरण, जल संसाधनों और कृषि व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कुम्हारी मानपुर जलाशय समेत आसपास के जल स्रोतों की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है। उनका मानना है कि यदि ऐसे उद्योग स्थापित होते हैं तो क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है और भविष्य में खेती तथा पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है।
भूजल दोहन का भी उठ रहा मुद्दा
आंदोलन से जुड़े ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योगों के विस्तार से भूजल का अधिक(Farmers Protest) उपयोग होगा। इससे किसानों को सिंचाई संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और आम लोगों के लिए भी पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इन्हीं मुद्दों को लेकर किसान लंबे समय से अपनी बात रख रहे हैं और विभिन्न स्तरों पर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
ग्रामीणों ने रखी अपनी प्रमुख मांगें
ग्रामीणों की मांग है कि क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ाने वाले उद्योगों की स्थापना पर रोक लगाई जाए। साथ ही किसानों और ग्रामीण परिवारों के हितों को प्राथमिकता देते हुए जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि विकास के साथ साथ पर्यावरण और कृषि आधारित जीवन व्यवस्था का संरक्षण भी जरूरी है।
गांव गांव में चल रहा जनसंपर्क
आंदोलन को सफल बनाने के लिए विभिन्न गांवों में लगातार जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। किसान, मजदूर, युवा और ग्रामीण बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह संघर्ष केवल किसी एक गांव या समूह का नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के अधिकारों, संसाधनों और भविष्य से जुड़ा (Farmers Protest) विषय है। अब 22 जून को होने वाला थाना घेराव प्रशासन के सामने ग्रामीणों की सामूहिक आवाज के रूप में सामने आएगा। लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि उनकी मांगों को लेकर शासन प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।





