सीजी भास्कर, 06 अगस्त। ईरान से जुड़े युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच अप्रैल से जून की अवधि में दुनिया की छह सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने मिलकर रिकॉर्ड 81 अरब डॉलर (करीब 7.7 लाख करोड़ रुपये) का मुनाफा कमाया। (Iran War Oil Prices)
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महंगे तेल का असर वैश्विक महंगाई पर भी पड़ा : Iran War Oil Prices
यह राशि भारत के वार्षिक रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है। युद्ध की शुरुआत के समय कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो बाद में 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। बढ़ती कीमतों का असर दुनियाभर में महंगाई पर भी देखने को मिला।
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लाल सागर में भारतीय जहाज पर हमला
इस बीच पश्चिम एशिया से जुड़े कई अहम घटनाक्रम भी सामने आए। यमन के पास लाल सागर में भारतीय ध्वज वाले कारोबारी जहाज एमएसवी फैजे नूर-ए-औलिया पर हमला हुआ, हालांकि जहाज पर सवार सभी 13 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया। वहीं ईरान में विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी की खबरें हैं।
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अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से WTI क्रूड में आई गिरावट : Iran War Oil Prices
दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 5 प्रतिशत टूटकर 76.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
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