सीजी भास्कर, 21 जून : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (Meditation Leave Scheme) के बीच राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल चर्चा में है। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को तनावमुक्त जीवन तथा मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ध्यान-योग और विपश्यना शिविरों में भाग लेने के लिए 12 दिन का विशेष अवकाश देने की व्यवस्था की गई है। हैरानी की बात यह है कि आदेश जारी होने के करीब दो महीने बाद भी इस सुविधा का लाभ लेने के लिए एक भी आवेदन सामने नहीं आया है।
सरकार की ओर से कर्मचारियों को यह अवकाश विशेष सुविधा के रूप में दिया जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों की उदासीनता ने योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
12 दिन का विशेष अवकाश, ड्यूटी के रूप में होगा शामिल
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार कर्मचारी और अधिकारी ध्यान-योग एवं विपश्यना शिविरों में भाग लेने के लिए 12 दिन का विशेष अवकाश ले सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अवधि को नियमित अवकाश नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे ड्यूटी अवधि के रूप में दर्ज किया जाएगा।
अर्थात कर्मचारियों के अवकाश खाते से कोई कटौती नहीं होगी और उन्हें पूर्ण वेतन एवं अन्य सुविधाएं भी मिलती रहेंगी। इसके बावजूद विभागों में इस योजना के तहत अब तक कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
तनाव कम करने के उद्देश्य से शुरू हुई पहल
सरकार का मानना है कि वर्तमान समय में प्रशासनिक जिम्मेदारियां, समयबद्ध लक्ष्य, बढ़ता कार्यभार और निरंतर दबाव कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई ताकि कर्मचारी कुछ समय आत्मचिंतन, ध्यान और मानसिक शांति के लिए निकाल सकें।
विपश्यना और ध्यान शिविरों को मानसिक संतुलन, आत्मअनुशासन और तनाव प्रबंधन का प्रभावी माध्यम माना जाता है। कई विशेषज्ञ भी इसे मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताते हैं।
विपश्यना के सख्त नियमों से दूर भाग रहे कर्मचारी
कर्मचारी संगठनों और जानकारों का मानना है कि विपश्यना शिविरों के कठोर नियम कर्मचारियों की रुचि कम कर रहे हैं। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को मोबाइल फोन, इंटरनेट, टीवी, समाचार पत्र और बाहरी संपर्क से पूरी तरह दूर रहना पड़ता है।
इसके अलावा कई दिनों तक मौन साधना और परिवार से संवाद न करने जैसी शर्तें भी होती हैं। वर्तमान डिजिटल युग में अधिकांश लोग इतने लंबे समय तक बाहरी दुनिया से कटकर रहने के लिए तैयार नहीं हो पा रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों ने दिए वैकल्पिक सुझाव
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ध्यान-योग के साथ अन्य आध्यात्मिक, धार्मिक, प्राकृतिक या व्यक्तित्व विकास कार्यक्रमों को भी इस विशेष अवकाश के दायरे में शामिल करे तो अधिक कर्मचारी इसका लाभ उठा सकते हैं।
उनका मानना है कि हर व्यक्ति की आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्राप्त करने की अपनी अलग पद्धति होती है। ऐसे में विकल्प बढ़ाने से योजना अधिक प्रभावी बन सकती है।
सरकार को आवेदन का इंतजार
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना पूरी तरह लागू है और आवेदन प्राप्त होने पर नियमानुसार स्वीकृति दी जाएगी। फिलहाल सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य और तनावमुक्त कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है।
हालांकि दो महीने में एक भी आवेदन नहीं आने से यह साफ है कि कर्मचारियों को इस सुविधा के प्रति आकर्षित करने के लिए जागरूकता और विश्वास बढ़ाने की जरूरत है।





