सीजी भास्कर, 21 जून : छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत (Bharat in University Degree) को प्रमुखता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अपनी डिग्री, अंकसूची और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ शब्द का उपयोग करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह फैसला भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय अस्मिता को सशक्त करने की सोच के तहत लिया गया है।
छह माह पहले पारित हुआ था प्रस्ताव
विश्वविद्यालय प्रशासन (Bharat in University Degree) के अनुसार यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया है। लगभग छह माह पहले विश्वविद्यालय की स्थायी समिति ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया था। कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल ने बताया कि वर्तमान में प्रमाणपत्रों में हिंदी में ‘भारत’ और अंग्रेजी में ‘इंडिया’ लिखा जाता है, लेकिन अब नए प्रारूप में अंग्रेजी दस्तावेजों में भी ‘भारत’ शब्द का उपयोग किया जाएगा।
हालांकि यह बदलाव तत्काल लागू नहीं होगा। पहले से मुद्रित डिग्री, अंकसूची और अन्य दस्तावेजों का स्टॉक समाप्त होने के बाद नए प्रारूप का उपयोग शुरू किया जाएगा।
हेमचंद विश्वविद्यालय में पहले से लागू है व्यवस्था
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने बताया कि विश्वविद्यालय पिछले एक वर्ष से अपने दस्तावेजों में ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ लिख रहा है। इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है।
नए शैक्षणिक सत्र से अन्य विश्वविद्यालय भी कर सकते हैं बदलाव
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल ने बताया कि नए शैक्षणिक सत्र से इस व्यवस्था को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण अरोरा ने कहा है कि आगामी कार्य परिषद की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव लाया जाएगा।
जी-20 सम्मेलन से मिली प्रेरणा
कुलपति प्रो. चक्रवाल ने बताया कि वर्ष 2023 में भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से जारी आधिकारिक रात्रिभोज के निमंत्रण पत्र में ‘भारत के राष्ट्रपति’ शब्द का उपयोग किया गया था। उनके अनुसार यह भारतीय पहचान और सांस्कृतिक गौरव को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण उदाहरण है।
विश्वविद्यालय का मानना है कि जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से जुड़े दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द का प्रयोग किया जा सकता है, तो शैक्षणिक संस्थानों द्वारा भी इसे अपनाया जाना स्वाभाविक है।
देशभर के कई विश्वविद्यालय अपना रहे नई व्यवस्था
‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ शब्द के उपयोग की पहल केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के लगभग 17 विश्वविद्यालय इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों को शैक्षणिक दस्तावेजों में स्थान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।





