सीजी भास्कर अहिवारा, 22 जून। राजस्व प्रकरणों के त्वरित और समयबद्ध निराकरण के सरकारी दावों के बीच अहिवारा तहसील में सैकड़ों मामले लंबित होने की शिकायतें सामने (Revenue Cases) आ रही हैं। सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा, नक्शा सुधार, अभिलेख दुरुस्ती तथा कलेक्टर की अनुमति के बिना शासकीय पट्टाधारी (काबिल कास्त) भूमि की खरीदी-बिक्री से जुड़े प्रकरणों में कार्रवाई की धीमी गति के कारण आम नागरिकों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
CG Bhaskar को प्राप्त जानकारी और स्थानीय लोगों की शिकायतों के अनुसार कई आवेदक महीनों से अपने प्रकरणों के निराकरण का इंतजार कर रहे हैं। आवेदन स्वीकार होने और सुनवाई की तिथि मिलने के बावजूद कई मामलों में अंतिम आदेश या कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इससे भूमि विवाद बढ़ रहे हैं और किसानों, भू-स्वामियों तथा आम नागरिकों को आर्थिक और मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है।
जनसुनवाई तक पहुंच रहे शिकायतकर्ता Revenue Cases
तहसील स्तर पर समाधान नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोग कलेक्टर जनदर्शन और जनसुनवाई में अपनी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा आश्वासन तो दिया जाता है, लेकिन वास्तविक कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं हो रही। इससे लोगों का प्रशासनिक प्रक्रिया पर भरोसा प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर
अहिवारा तहसील के ग्रामीण इलाकों में सीमांकन और बंटवारा संबंधी प्रकरणों की संख्या अधिक बताई जा रही है। कई गांवों में नक्शों की त्रुटियां, रिकॉर्ड में विसंगतियां और अभिलेख सुधार के मामले वर्षों पुराने होने की बात सामने आई है। इन लंबित प्रकरणों के कारण भूमि खरीद-बिक्री, बैंक ऋण, फसल बीमा और अन्य प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
काबिल कास्त भूमि के मामलों पर भी सवाल
क्षेत्र में शासकीय पट्टाधारी (काबिल कास्त) भूमि की खरीदी-बिक्री से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई में भी देरी की शिकायतें हैं। नागरिकों का कहना है कि ऐसे मामलों में स्पष्ट और समयबद्ध निर्णय नहीं होने से भविष्य में बड़े भूमि विवाद खड़े हो सकते हैं।
प्रशासन से समयबद्ध समाधान की मांग
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि तहसील स्तर पर लंबित राजस्व प्रकरणों की विशेष समीक्षा (Revenue Cases) की जाए और प्रत्येक मामले के निराकरण के लिए समयसीमा तय की जाए। लोगों का कहना है कि जवाबदेही तय होने और नियमित मॉनिटरिंग से न केवल लंबित मामलों का निपटारा होगा, बल्कि जनसुनवाई में पहुंचने वाली शिकायतों की संख्या भी कम होगी।
🔹 सीमांकन के अनेक मामले लंबित
🔹 नामांतरण प्रकरणों के निराकरण में देरी
🔹 बंटवारा संबंधी आवेदन अटके
🔹 नक्शा सुधार और अभिलेख दुरुस्ती प्रभावित
🔹 काबिल कास्त भूमि संबंधी मामलों में कार्रवाई की मांग
🔹 आवेदकों को बार-बार तहसील कार्यालय और जनसुनवाई के चक्कर लगाने पड़ रहे
बड़ा सवाल ❓
जब राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण के निर्देश पहले से मौजूद (Revenue Cases) हैं, तो अहिवारा तहसील में लंबित मामलों का बोझ लगातार क्यों बढ़ रहा है? क्या प्रशासन विशेष अभियान चलाकर लोगों को राहत दिला पाएगा?






