सीजी भास्कर, 29 जून। मैकबुक और आईपैड की बढ़ी कीमतों को लेकर बाजार में लगातार चर्चा (MacBook) चल रही है। इलेक्ट्रॉनिक बाजार से लेकर तकनीक पसंद करने वाले लोगों के बीच यही सवाल उठ रहा है कि आखिर कीमतों में अचानक बढ़ोतरी क्यों हुई। इसी बीच अब कंपनी की ओर से उठाया गया एक नया कदम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
बताया जा रहा है कि उत्पादन लागत बढ़ने और जरूरी पुर्जों की उपलब्धता प्रभावित होने के बाद कंपनी ने नई सप्लाई व्यवस्था तलाशनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में अमेरिकी प्रशासन से एक चीनी मेमोरी चिप निर्माता कंपनी से चिप्स खरीदने की अनुमति मांगी गई है, जिससे आगे की सप्लाई आसान हो सके।
मेमोरी चिप की कमी से बढ़ी चुनौती MacBook
मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की उपलब्धता पहले की तुलना में सीमित हो गई है। साथ ही इनकी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने से उत्पादन खर्च भी बढ़ा है। इसी वजह से कंपनी पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि चीनी कंपनी से चिप्स खरीदने की मंजूरी मिल जाती है तो सप्लाई चेन मजबूत होगी और उत्पादन सामान्य तरीके से जारी रखने में आसानी मिलेगी।
चीनी कंपनी को लेकर बना हुआ है विवाद
जिस चीनी कंपनी से चिप्स खरीदने की अनुमति मांगी गई है, वह अमेरिकी रक्षा विभाग की निगरानी सूची में शामिल कंपनियों में गिनी जाती है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस कंपनी के कुछ संस्थानों का संबंध चीन की सेना से जुड़े संगठनों के साथ हो सकता है। इसी कारण ऐसे मामलों में बड़े कारोबारी समझौतों से पहले सरकारी अनुमति जरूरी मानी जाती है।
अमेरिकी प्रशासन के सामने रखा पक्ष
जानकारी के अनुसार कंपनी ने करीब एक महीने पहले अमेरिकी वाणिज्य विभाग से संपर्क (MacBook) किया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन के समक्ष अपनी जरूरत और तर्क रखते हुए मंजूरी हासिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। कंपनी का कहना है कि सीमित विकल्पों की वजह से अतिरिक्त सप्लायर्स की जरूरत महसूस हो रही है ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।
कानूनी रोक नहीं, फिर भी जरूरी है अनुमति
जानकारों के मुताबिक चीनी मेमोरी चिप कंपनियों से खरीदारी करने पर कोई सीधी कानूनी रोक नहीं है। हालांकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों और सरकारी निगरानी के कारण ऐसे मामलों में प्रशासन की मंजूरी अहम मानी जाती है। इसी वजह से अंतिम फैसला मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।



