सीजी भास्कर, 24 जून : पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध 160 कॉलेजों के खिलाड़ियों पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन (Sports Budget PRSU) के बावजूद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में करीब 3.60 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी विश्वविद्यालय का एक भी खिलाड़ी ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में पदक हासिल नहीं कर सका है।
करोड़ों का बजट, लेकिन पदक का इंतजार
(Sports Budget PRSU) के तहत विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि 31 खेलों के लिए मैदान, आधुनिक उपकरण और कोचिंग की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हर वर्ष 100 से अधिक खिलाड़ी विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पहुंचते हैं, लेकिन पदक तालिका में विश्वविद्यालय का खाता अब तक नहीं खुल पाया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं।
10 दिन से घटाकर 5 दिन किए गए प्रशिक्षण शिविर
खेल प्रशिक्षकों का कहना है कि (Sports Budget PRSU) के बावजूद खिलाड़ियों के प्रशिक्षण शिविरों की अवधि पहले 10 दिन होती थी, जिसे घटाकर अब केवल पांच दिन कर दिया गया है। उनका मानना है कि कम समय के प्रशिक्षण के कारण खिलाड़ियों को पर्याप्त अभ्यास नहीं मिल पाता, जिससे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन प्रभावित होता है।
प्रशिक्षकों के अनुसार शिविरों की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव भी दिया गया था, लेकिन बजट बढ़ने की आशंका के चलते इसे मंजूरी नहीं मिल सकी।
सुविधाओं और संसाधनों को लेकर अलग-अलग दावे
विश्वविद्यालय के खेल विभाग का कहना है कि (Sports Budget PRSU) के तहत खिलाड़ियों को आवश्यक खेल सामग्री, उपकरण और अभ्यास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं तथा पदक जीतना खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
वहीं कुछ प्रशिक्षकों का दावा है कि कई खेलों में पर्याप्त बजट और संसाधनों का अभाव है। उनका कहना है कि कई खिलाड़ियों को निजी उपकरणों के सहारे अभ्यास करना पड़ता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर की तैयारी प्रभावित होती है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन सुधारना सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि (Sports Budget PRSU) का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब करोड़ों रुपये के निवेश का परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर पदकों के रूप में दिखाई देगा। उनका कहना है कि प्रशिक्षण शिविरों की अवधि बढ़ाने, आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और खिलाड़ियों को वर्षभर गुणवत्तापूर्ण कोचिंग देने से प्रदर्शन में सुधार संभव है।
खेल जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि बुनियादी तैयारियों, संसाधनों और प्रशिक्षण व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तो विश्वविद्यालय के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में अपनी जगह बना सकते हैं।



