सीजी भास्कर, 30 जून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet Expansion) में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार मंत्रिमंडल का विस्तार करने के साथ-साथ कई मंत्रालयों का पुनर्गठन भी कर सकती है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं की गई है।
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज
सूत्रों के मुताबिक संभावित फेरबदल में कई मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, जबकि कुछ नए सांसदों और नेताओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने की भी चर्चा है। माना जा रहा है कि सरकार प्रदर्शन और राजनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई टीम तैयार कर सकती है।
मानसून सत्र से पहले हो सकता है फैसला
मंत्रिमंडल विस्तार की संभावित तारीखों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। राष्ट्रपति के कार्यक्रम, विदेशी नेताओं की प्रस्तावित भारत यात्रा और प्रधानमंत्री के विदेश दौरों को देखते हुए 5 जुलाई या 11 जुलाई के बाद किसी भी समय विस्तार की संभावना जताई जा रही है। यदि उस दौरान निर्णय नहीं होता है तो 20 जुलाई से पहले, संभावित मानसून सत्र शुरू होने से पूर्व भी मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है।
चुनावी राज्यों को मिल सकता है प्रतिनिधित्व
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन राज्यों में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां के नेताओं को मंत्रिमंडल में प्राथमिकता दी जा सकती है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे राज्यों के नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर चुनावी और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति अपनाई जा सकती है।
सामाजिक संतुलन और युवा चेहरों पर रहेगा फोकस
बताया जा रहा है कि संभावित (Cabinet Expansion) में महिलाओं, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति-जनजाति समुदाय और युवा नेताओं को अधिक अवसर दिए जा सकते हैं। भाजपा संगठन में हाल में हुए बदलावों की तर्ज पर सरकार भी सामाजिक संतुलन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि विभिन्न वर्गों तक सकारात्मक राजनीतिक संदेश पहुंचाया जा सके।
कुछ वरिष्ठ नेताओं की भूमिका में हो सकता है बदलाव
सूत्रों के अनुसार उम्र और प्रदर्शन के आधार पर कुछ वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। खासकर 75 वर्ष की आयु के करीब पहुंच चुके नेताओं की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि इसके जरिए अनुभवी और युवा नेतृत्व के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा सकता है।
हालांकि, केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में संभावित फेरबदल और नए मंत्रियों के नामों को लेकर चल रही सभी चर्चाओं को फिलहाल अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।



