सीजी भास्कर, 1 जुलाई। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रवेश (Government School Admission) को लेकर नया विवाद सामने आया है। शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि कई सरकारी स्कूलों में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश देने से इनकार किया जा रहा है। संघ का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं के कमजोर परिणाम के बाद प्राचार्यों पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई का असर अब नए विद्यार्थियों के दाखिले पर दिखाई देने लगा है।
कम अंक वाले विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं देने का आरोप
शिक्षक संघ के अनुसार, कई स्कूलों में सरकारी स्कूलों में प्रवेश (Government School Admission) के दौरान विद्यार्थियों के पिछले परीक्षा परिणाम को आधार बनाया जा रहा है। कम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को दाखिला देने से मना किया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। संघ का कहना है कि यह व्यवस्था शिक्षा के अधिकार और शासन के निर्धारित नियमों के विपरीत है।
बेहतर रिजल्ट के दबाव का बताया असर
संघ ने अपने पत्र में कहा है कि बोर्ड परीक्षा परिणाम बेहतर लाने के बढ़ते दबाव के कारण स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कार्रवाई के डर से कुछ स्थानों पर अनुचित तरीकों को अपनाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। शिक्षक संघ का कहना है कि केवल अच्छे परीक्षा परिणाम हासिल करने की होड़ में शिक्षा का मूल उद्देश्य पीछे छूटता जा रहा है।
ड्रॉपआउट कम करने के लक्ष्य पर उठाए सवाल
शिक्षक संघ का कहना है कि एक ओर सरकार स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करने के लिए लगातार अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर यदि सरकारी स्कूलों में प्रवेश (Government School Admission) के दौरान ही इच्छुक विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिलेगा तो इस लक्ष्य को हासिल करना कठिन हो जाएगा। इससे शिक्षा से वंचित होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ सकती है।
सरकार से स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग
शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मांग की है कि सभी सरकारी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सरकारी स्कूलों में प्रवेश (Government School Admission) के दौरान किसी भी विद्यार्थी के साथ अंक के आधार पर भेदभाव न किया जाए। संघ का कहना है कि प्रत्येक पात्र और इच्छुक विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव के प्रवेश मिलना चाहिए, ताकि सभी बच्चों को समान शिक्षा का अवसर सुनिश्चित हो सके।



