सीजी भास्कर, 1 जुलाई। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक मुरूमसिल्ली बांध (Murumusilli Dam) को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही आशंकाओं को जल संसाधन विभाग ने पूरी तरह निराधार बताया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 103 वर्ष पुराना यह बांध पूरी तरह सुरक्षित, मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम है। मानसून को देखते हुए विशेषज्ञ अभियंताओं की निगरानी में नियमित निरीक्षण, परीक्षण और आवश्यक मरम्मत कार्य लगातार किए जा रहे हैं।
अफवाहों से बचने की अपील
मानसून के दौरान बांधों की सुरक्षा को लेकर कई तरह की भ्रामक जानकारियां सामने आती रहती हैं। ऐसे में जल संसाधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि मुरूमसिल्ली बांध (Murumusilli Dam) को लेकर किसी भी तरह की अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और केवल अधिकृत जानकारी को ही सही मानें।
विशेषज्ञ टीम ने किया विस्तृत निरीक्षण
हाल ही में मुख्य अभियंता के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने मुरूमसिल्ली बांध (Murumusilli Dam) का व्यापक तकनीकी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तटबंधों, मुख्य संरचना और स्लुइस गेट सहित सभी महत्वपूर्ण हिस्सों की बारीकी से जांच की गई। अधिकारियों ने बताया कि बांध की संरचना पूरी तरह सुरक्षित है और कहीं भी किसी प्रकार की दरार या क्षति नहीं मिली।
बारिश से पहले सुरक्षा कार्य तेज
भारी वर्षा के दौरान मिट्टी के कटाव से तटबंधों की सुरक्षा के लिए विभाग ने वर्षा पूर्व सभी आवश्यक कार्य तेज कर दिए हैं। रेनकट रोकने, तटबंधों को मजबूत बनाने और संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम युद्धस्तर पर जारी है ताकि मानसून के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
जल प्रबंधन पर विशेष फोकस
विभाग के अनुसार मुरूमसिल्ली बांध (Murumusilli Dam) में वर्तमान में 130.07 एमसीएम यानी 80.29 प्रतिशत जल संग्रहण हो चुका है। वहीं गंगरेल जलाशय में 325.95 एमसीएम (42.50 प्रतिशत) पानी उपलब्ध है। भविष्य में कम वर्षा की स्थिति में सिंचाई और पेयजल की जरूरत पूरी करने के लिए मुरूमसिल्ली से नियंत्रित मात्रा में पानी गंगरेल जलाशय की ओर छोड़ा जा रहा है।
प्रदेश की ऐतिहासिक जल धरोहर
साल 1923 में निर्मित मुरूमसिल्ली बांध (Murumusilli Dam) छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण जल संरचनाओं में शामिल है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में किए जा रहे सभी रखरखाव और मरम्मत कार्य नियमित तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा हैं और बांध पूरी तरह सुरक्षित है।



