सीजी भास्कर, 15 अगस्त। आजादी के बाद भारत ने आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी मोर्चे पर लंबी दूरी तय की है। सीमित विदेशी मुद्रा भंडार, कम साक्षरता और कम जीवन प्रत्याशा वाले देश से आगे बढ़ते हुए भारत करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन चुका है। निर्यात, बिजली उत्पादन, शेयर बाजार और इंटरनेट के विस्तार ने भी देश की बदलती तस्वीर को सामने रखा है। (India Development Journey)
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अर्थव्यवस्था से विदेशी मुद्रा भंडार तक बड़ा बदलाव : India Development Journey
वर्ल्ड बैंक के अनुसार 2025 में भारत की GDP करीब 3.96 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। 2025 में प्रति व्यक्ति GDP 2,702.5 डॉलर रही। सरकार ने 2047 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
विदेशी मुद्रा भंडार में भी कई गुना वृद्धि हुई है। 24 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 676.24 अरब डॉलर था। वहीं 1947-48 में देश की विदेशी मुद्रा स्थिति मुख्य रूप से स्टर्लिंग बैलेंस पर निर्भर थी।
निर्यात के मोर्चे पर भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। 1947-48 में सामान का निर्यात करीब 403 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025-26 में सामान और सेवाओं का कुल निर्यात करीब 860.09 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।
जीवन प्रत्याशा में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 1951 में यह करीब 32 साल थी, जबकि 2024 में बढ़कर करीब 72 साल हो गई। साक्षरता दर भी 1951 के 18.33 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 80.9 प्रतिशत हो गई।

बिजली, शेयर बाजार और इंटरनेट ने बदली तस्वीर
बिजली क्षेत्र में भारत का विस्तार तेजी से हुआ है। 1947 में बिजली उत्पादन क्षमता करीब 1,362 मेगावाट थी और कुल उत्पादन लगभग 4,073 GWh था। वित्त वर्ष 2024-25 तक यूटिलिटी बिजली उत्पादन करीब 1.824 ट्रिलियन यूनिट पहुंच गया। मार्च 2025 तक यूटिलिटी बिजली उत्पादन क्षमता करीब 475,212 मेगावाट थी।
शेयर बाजार का आकार भी कई गुना बढ़ा है। 1947 के आसपास बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में करीब 1,100 कंपनियां सूचीबद्ध थीं और उनका कुल बाजार मूल्य लगभग 1,000 करोड़ रुपये था। 2025 में भारत की सूचीबद्ध घरेलू कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब 10.56 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
डिजिटल क्षेत्र में बदलाव सबसे तेज (India Development Journey) रहा है। 1947 में इंटरनेट का अस्तित्व नहीं था, जबकि मार्च 2026 तक भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर की संख्या 1,092.79 मिलियन हो गई। इनमें ब्रॉडबैंड सब्सक्रिप्शन करीब 1,065.88 मिलियन थे।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी तेजी से विस्तारित हुआ है। ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, मशीनरी, टेक्सटाइल और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में भारत की औद्योगिक क्षमता बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में स्थिर कीमतों पर मैन्युफैक्चरिंग GVA का अनुमान करीब 47.84 लाख करोड़ रुपये रहा और इस क्षेत्र में वास्तविक वृद्धि 11.5 प्रतिशत दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि 1947 से 2026 तक भारत ने अर्थव्यवस्था के आकार के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, व्यापार, पूंजी बाजार और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन दर्ज किया है। देश अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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