सीजी भास्कर, 05 जुलाई : छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पंडवानी की महान लोक गायिका तीजन बाई (Pandwani Legend Teejan Bai) अब हमारे बीच नहीं रहीं। रायपुर स्थित एम्स में लंबे समय से उपचाररत रहने के बाद शनिवार देर रात 70 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। रविवार को उनके दुर्ग स्थित निवास पर अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। पंडवानी की महान लोक गायिका तीजन बाई (Pandwani Legend Teejan Bai) को श्रद्धांजलि देने कलाकारों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने पहुंचकर नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
दुर्ग स्थित निवास पर अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
रविवार को पंडवानी की महान लोक गायिका तीजन बाई (Pandwani Legend Teejan Bai) के पार्थिव शरीर को उनके दुर्ग स्थित निवास पर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया। जैसे ही उनके आने की सूचना मिली, बड़ी संख्या में कलाकार, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और आम लोग वहां पहुंचने लगे। हर आंख नम थी और हर जुबान पर उनकी कला, संघर्ष और लोक संस्कृति के प्रति समर्पण की चर्चा सुनाई दे रही थी। पूरे वातावरण में शोक और सम्मान का भाव स्पष्ट दिखाई दिया।
महापौर निर्मल कोसरे ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
भिलाई-चरोदा के महापौर निर्मल कोसरे ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पंडवानी की महान लोक गायिका तीजन बाई (Pandwani Legend Teejan Bai) केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर थीं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उनके अद्वितीय योगदान को सम्मान देते हुए उन्हें पद्म श्री (Padma Shri), पद्म भूषण (Padma Bhushan) और पद्म विभूषण (Padma Vibhushan) जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया। उनके अनुसार ऐसे महान कलाकार सदियों में जन्म लेते हैं और अपनी कला से समाज को नई दिशा देते हैं।
छोटे से गांव से निकलकर 26 देशों तक पहुंची पंडवानी
एक छोटे से गांव से अपनी कला यात्रा शुरू करने वाली पंडवानी की महान लोक गायिका तीजन बाई (Pandwani Legend Teejan Bai) ने अपनी बुलंद आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली के दम पर पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने 26 देशों में पंडवानी की प्रस्तुतियां देकर भारतीय लोक संस्कृति का गौरव बढ़ाया और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व मंच पर स्थापित किया। उनकी प्रस्तुतियां केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारतीय महाकाव्य परंपरा और लोक संस्कृति का जीवंत परिचय बन गईं।
लोककला की विरासत हमेशा रहेगी जीवंत
पंडवानी की महान लोक गायिका तीजन बाई (Pandwani Legend Teejan Bai) की विशिष्ट गायन शैली, मंच पर सशक्त प्रस्तुति और लोककला के संरक्षण के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनके निधन को भारतीय लोककला जगत की अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके प्रशंसकों का कहना है कि भले ही आज उनकी आवाज खामोश हो गई हो, लेकिन पंडवानी की हर गूंज, हर मंच और हर प्रस्तुति में तीजन बाई का नाम हमेशा अमर रहेगा।



