सीजी भास्कर, 06 जुलाई : छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के तहत धमतरी जिले में संचालित आईएफसी नर्सरी (IFC Nursery) ग्रामीण आजीविका और कृषि विकास का सफल मॉडल बनकर उभरी है। जनपद पंचायत धमतरी द्वारा सद्भावना महिला संकुल स्तरीय संगठन, दोनर के सहयोग से संचालित यह आजीविका सेवा केंद्र किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौधों का विश्वसनीय केंद्र बन चुका है। आईएफसी नर्सरी (IFC Nursery) के माध्यम से किसानों को समय पर बेहतर पौधे उपलब्ध होने के साथ वैज्ञानिक खेती, जैविक उत्पादन और महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा मिल रही है।
- स्थानीय स्तर पर मिल रहे गुणवत्तापूर्ण पौधे, घटी खेती की लागत
- सब्जी और फलदार पौधों का हो रहा उन्नत उत्पादन
- महिला स्व-सहायता समूहों के लिए बना आत्मनिर्भरता का माध्यम
- 38 हजार से अधिक पौधों का उत्पादन, ₹1.15 लाख से अधिक की आय
- जैविक खेती और वैज्ञानिक कृषि को मिल रहा बढ़ावा
- प्रशासनिक मार्गदर्शन में बन रही सफलता की मिसाल
स्थानीय स्तर पर मिल रहे गुणवत्तापूर्ण पौधे, घटी खेती की लागत
पहले किसानों को सब्जी एवं फलदार पौधों के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई बार समय पर पौधे नहीं मिलने या निम्न गुणवत्ता के कारण उत्पादन प्रभावित होता था। आईएफसी नर्सरी (IFC Nursery) की स्थापना के बाद अब स्थानीय स्तर पर प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार कर किसानों तक समय पर पहुंचाए जा रहे हैं। इससे खेती की लागत में कमी आई है और उत्पादन की संभावनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सब्जी और फलदार पौधों का हो रहा उन्नत उत्पादन
आईएफसी नर्सरी (IFC Nursery) में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, करेला, मूनगा (सहजन), पपीता, कटहल, नारियल सहित विभिन्न सब्जी एवं फलदार फसलों की उन्नत पौध तैयार की जा रही है। इन पौधों का वितरण उत्पादक समूहों और क्लस्टरों के माध्यम से विभिन्न गांवों के किसानों तक किया जा रहा है। इससे क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिला है और किसान वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को तेजी से अपना रहे हैं।

महिला स्व-सहायता समूहों के लिए बना आत्मनिर्भरता का माध्यम
इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आईएफसी नर्सरी (IFC Nursery) का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार, नियमित आय और उद्यमिता का अवसर मिला है। समूह की महिलाएं पौध उत्पादन, देखरेख, विपणन और प्रबंधन की जिम्मेदारियां सफलतापूर्वक निभाते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
38 हजार से अधिक पौधों का उत्पादन, ₹1.15 लाख से अधिक की आय
वर्तमान चरण में आईएफसी नर्सरी (IFC Nursery) द्वारा 38,100 गुणवत्तापूर्ण पौधों का उत्पादन एवं वितरण किया जा चुका है। इससे 1 लाख 15 हजार 150 रुपये की आय अर्जित हुई है। यह उपलब्धि महिला स्व-सहायता समूहों, ग्राम संगठन, उत्पादक समूहों, आईएफसी एंकर तथा क्लस्टर टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।
जैविक खेती और वैज्ञानिक कृषि को मिल रहा बढ़ावा
इस पहल से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ जैविक खेती, पोषण वाटिका, फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को भी बढ़ावा मिल रहा है। बेहतर गुणवत्ता वाले पौधों के कारण फसलों की वृद्धि, उत्पादन और किसानों की आय में सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है। आईएफसी नर्सरी (IFC Nursery) ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
प्रशासनिक मार्गदर्शन में बन रही सफलता की मिसाल
यह परियोजना कलेक्टर अबिनाश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेंद्र सिंह ठाकुर, जिला परियोजना प्रबंधक (आजीविका) अनुराग मिश्रा, जनपद पंचायत धमतरी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी वर्षा रानी चिकन्जूरी तथा ब्लॉक परियोजना प्रबंधक प्रेमचंद सिन्हा के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है।

आईएफसी नर्सरी (IFC Nursery) यह साबित कर रही है कि महिलाओं की सहभागिता, आधुनिक कृषि तकनीक और संस्थागत सहयोग के प्रभावी समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। धमतरी की यह पहल आज अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है और किसानों की आय बढ़ाने, महिला सशक्तिकरण तथा ग्रामीण आजीविका संवर्धन का सफल मॉडल बनकर उभरी है।



