सीजी भास्कर, 14 जुलाई : क्रमोन्नति वेतनमान की मांग कर रहे शिक्षकों को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (High Court on Kramonnati Pay Scale) से बड़ा झटका लगा है। धमतरी जिले के 14 शिक्षकों की ओर से दायर याचिकाओं को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस विवाद पर पहले ही डिवीजन बेंच फैसला दे चुकी है, इसलिए 10 मार्च 2017 के शासन परिपत्र का लाभ देने का कोई आधार नहीं बनता।
- डिवीजन बेंच के फैसले का हवाला
- 14 शिक्षकों ने दी थी चुनौती
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- पहले ही तय हो चुका है विवाद
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- कोर्ट ने क्या कहा
डिवीजन बेंच के फैसले का हवाला
बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में क्रमोन्नति वेतनमान मामला (High Court on Kramonnati Pay Scale) की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने की। कोर्ट ने कहा कि सभी याचिकाओं में कानून और तथ्य समान हैं, इसलिए एक ही आदेश से उनका निपटारा किया गया।
14 शिक्षकों ने दी थी चुनौती
याचिकाकर्ताओं में भुवन लाल बैस, संजय कुमार साहू, मितेश कुमार पाल, लीला राम साहू, लक्ष्मी साहू सहित धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड में पदस्थ शिक्षक, सहायक शिक्षक और व्याख्याता (एलबी) शामिल थे। उन्होंने 10 मार्च 2017 के शासन परिपत्र के तहत क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ नहीं मिलने पर विभागीय आदेश को चुनौती दी थी।
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पहले ही तय हो चुका है विवाद
सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने अदालत को बताया कि यही विवाद पहले स्मृति आभा नामदेव एवं अन्य बनाम राज्य शासन मामले में तय हो चुका है। अदालत ने 13 मार्च 2026 को पुष्पलता माणिकपुरी एवं अन्य बनाम राज्य शासन के फैसले का अनुसरण करते हुए माना था कि ऐसे कर्मचारी पूर्व के राहत प्राप्त मामलों जैसी स्थिति में नहीं हैं। इसी आधार पर क्रमोन्नति वेतनमान मामला (High Court on Kramonnati Pay Scale) में वर्तमान याचिकाओं को भी खारिज कर दिया गया।
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कोर्ट ने क्या कहा
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि वे उन कर्मचारियों के समान परिस्थितियों में हैं, जिन्हें पहले राहत मिली थी। इसलिए 10 मार्च 2017 के शासन परिपत्र के तहत क्रमोन्नति वेतनमान का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता और सभी 14 रिट याचिकाएं निरस्त की जाती हैं।



