सीजी भास्कर, 14 जुलाई : मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले का ग्राम बरदर अब जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण आजीविका का नया मॉडल (MCB News) बनकर उभर रहा है। राज्य शासन के ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के तहत गांव में 52 एकड़ क्षेत्र में जल संरक्षण और फलोद्यान विकास का समेकित मॉडल तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना से हर साल करोड़ों लीटर वर्षा जल का संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार और महिलाओं के लिए स्थायी रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।
30 एकड़ में जल संरक्षण का बड़ा अभियान
परियोजना के तहत 30 एकड़ क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से जल संरक्षण संरचनाएं विकसित की गई हैं। इनमें 30×40 मॉडल के तहत 240 जल संरचनाएं, 1800 मीटर जल अवशोषण ट्रेंच एवं सीपीटी, तथा 5 हजार कंटूर ट्रेंच शामिल हैं। इन संरचनाओं के जरिए हर वर्ष करोड़ों लीटर वर्षा जल का संचयन और भूजल रिचार्ज सुनिश्चित होगा।
इसके अलावा गांव में 40 बोल्डर चेक डेम, 2 गेबियन संरचनाएं, एक पक्का चेक डेम और एक अर्दन चेक डेम भी बनाए गए हैं। इनसे वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और कई किसान परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही मिट्टी का कटाव रुकेगा और वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा।

22 एकड़ में तैयार होगा फलोद्यान
परियोजना के दूसरे चरण में 22 एकड़ क्षेत्र में 2 हजार से अधिक फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण किया जा रहा है। उद्यान विभाग द्वारा नर्सरी भी विकसित की जा रही है, जिससे भविष्य में पौधों की उपलब्धता बनी रहेगी और ग्रामीणों को बागवानी के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे।
महिलाओं की आजीविका को मिलेगा नया सहारा
फलोद्यान और नर्सरी के संचालन से महिला स्व-सहायता समूहों को स्थायी रोजगार मिलेगा। पौधों की देखभाल, फल उत्पादन, नर्सरी प्रबंधन और प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

पूरे प्रदेश के लिए बनेगा मॉडल
कलेक्टर संतन देवी जांगड़े के मार्गदर्शन में तैयार किया जा रहा यह मॉडल जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा, कृषि विकास और महिला सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण बन रहा है। प्रशासन का मानना है कि आने वाले वर्षों में ग्राम बरदर न केवल जल संकट से निपटने का प्रभावी मॉडल बनेगा, बल्कि हरित विकास और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई पहचान भी स्थापित करेगा।



