सीजी भास्कर, 17 जुलाई। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सरकारी प्राइमरी स्कूल के बच्चे जर्जर भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बारिश शुरू होते ही कक्षाओं में पानी टपकने लगता है, जिससे बच्चों को पढ़ाने से पहले उन्हें सुरक्षित स्थान पर बैठाना पड़ता है। (Bilaspur government schools)
मामला बन्नाकडीह चौक स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल का है। स्कूल साल 1956 से संचालित हो रहा है। स्कूल में बारिश से बचाव के लिए छत के नीचे हरा मेट लगाकर अस्थायी व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद बारिश का पानी कक्षा के भीतर गिर रहा है।
ऐसे में बच्चों को भीगने के साथ किसी अनहोनी का भी खतरा बना हुआ है। वहीं, इस मामले में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि जर्जर भवनों में बच्चों की कक्षाएं नहीं लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा गया है।
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जिले में 288 जर्जर स्कूल भवन : Bilaspur government schools
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बन्नाक चौक स्कूल की स्थिति जिले के अन्य जर्जर स्कूलों की भी तस्वीर पेश करती है। जिले में 288 जर्जर स्कूल भवन चिन्हित किए गए हैं। कुछ दिन पहले जिले के एक अन्य स्कूल में बच्चों के पेड़ के नीचे पढ़ाई करने की तस्वीर भी सामने आई थी।
हाईकोर्ट ने मांगी थी प्रोग्रेस रिपोर्ट
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पिछले साल जर्जर स्कूल भवनों से जुड़ी खबरों पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शासन और स्कूल शिक्षा सचिव से शपथ पत्र के साथ स्कूल भवनों की मरम्मत की प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कलेक्टर को ही जिम्मेदारी सौंपने पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि कलेक्टर हर जगह कैसे देखेंगे, शिक्षा सचिव की भी जिम्मेदारी है।
हर साल मरम्मत का दावा : Bilaspur government schools
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शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन हर साल बारिश से पहले जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और नए भवनों के निर्माण का दावा करते हैं। इसके बावजूद बारिश के दौरान कई स्कूलों में बच्चों को जर्जर भवनों में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
कलेक्टर बोले- जर्जर स्कूल में न लगाएं क्लास
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कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि स्कूलों के रिनोवेशन का काम लगातार चल रहा है। आवश्यकता के अनुसार स्कूलों को बजट भी उपलब्ध कराया गया है।
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