सीजी भास्कर, 18 जुलाई। रायपुर सेंट्रल जेल की महिला बंदियां अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नया कदम बढ़ा रही हैं। जेल प्रशासन के ‘निश्चय कार्यक्रम’ (Nishchay Program) के तहत उन्हें अचार और मसाला निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिला बंदियों ने विभिन्न प्रकार के अचार तैयार करना शुरू कर दिया है। इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय का एक हिस्सा सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाएगा।
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- Nishchay Program बिक्री से मिलेगी आर्थिक मजबूती
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जेल प्रशासन ने विभिन्न मामलों में बंद 60 महिला बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें अचार और मसाला निर्माण के साथ गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता, पैकेजिंग और सुरक्षित भंडारण की भी जानकारी दी गई, ताकि वे भविष्य में इसे स्वरोजगार के रूप में अपना सकें।
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रायपुर जिले के सेंट्रल जेल में महिला बंदियों द्वारा तैयार किए जा रहे ‘निश्चय कार्यक्रम’ (Nishchay Program) के तहत आम, नींबू, गाजर और लहसुन समेत कई तरह के अचार बनाए जा रहे हैं। इन उत्पादों की बिक्री केंद्रीय जेल परिसर स्थित आस्था गृह उद्योग स्टॉल (आस्था मुंगोड़ी सेंटर) और जेल कैंटीन के माध्यम से की जाएगी।
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Nishchay Program बिक्री से मिलेगी आर्थिक मजबूती
जेल प्रशासन का कहना है कि अचार की बिक्री से होने वाली आय का निर्धारित हिस्सा महिला बंदियों के बैंक खातों में जमा किया जाएगा। इससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होंगी और जेल से रिहा होने के बाद भी अपने पैरों पर खड़े होने में मदद मिलेगी।
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Nishchay Program रिहाई के बाद भी मिलेगा रोजगार का सहारा
जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि ‘निश्चय कार्यक्रम’ (Nishchay Program) का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि महिला बंदियों को ऐसा हुनर सिखाना है, जिससे वे जेल से बाहर आने के बाद सम्मानजनक आजीविका कमा सकें। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार चलाए जाएंगे, ताकि बंदियों का प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।
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