सीजी भास्कर, 22 जुलाई : राजधानी के कई सरकारी स्कूलों में खेल मैदान (School Ground Safety) अब बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान के बजाय जोखिम का कारण बनते जा रहे हैं। जिन मैदानों में विद्यार्थी खेल गतिविधियों, दौड़ और प्रतियोगिताओं की तैयारी करते थे, वहां अब मिट्टी की जगह बजरी, गिट्टी और राखड़ बिछा दी गई है। इससे खेल गतिविधियां प्रभावित होने के साथ बच्चों के चोटिल होने की आशंका भी बढ़ गई है।
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कीचड़ से बचने की कोशिश बनी परेशानी का कारण
जानकारी के अनुसार, बारिश के मौसम में मैदानों में होने वाले कीचड़ से बचने के लिए कई स्कूलों में बजरी और राखड़ डाली गई थी। हालांकि यह व्यवस्था अब विद्यार्थियों के लिए परेशानी बन गई है। मैदान में गिरने पर बच्चों के घुटने, कोहनी और हथेलियां छिलने के अलावा टखना मुड़ने और गंभीर चोट लगने का खतरा बना हुआ है। यही वजह है कि कई विद्यार्थी लंच ब्रेक और खेल पीरियड के दौरान मैदान में जाने से बच रहे हैं। वहीं खेल शिक्षकों को भी ऐसे मैदानों में अभ्यास कराने में परेशानी हो रही है।
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मोवा स्कूल का मैदान भी बदहाल
राजधानी के मोवा स्थित शासकीय स्कूल का खेल मैदान भी बजरी से ढका हुआ है। यह वही स्कूल है, जहां से अब तक 250 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। यहां का एक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है। लेकिन वर्तमान स्थिति में मैदान पर नियमित खेल अभ्यास प्रभावित हो रहा है। शाम के समय होने वाली खेल गतिविधियां भी लगभग बंद हो गई हैं।
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कई स्कूलों में मलबे और राखड़ से बिगड़ी स्थिति
भनपुरी के एक प्राथमिक स्कूल में पुराने भवन का मलबा मैदान में फैलाकर उसके ऊपर राखड़ डाल दी गई है। इससे मैदान की खेल उपयोगिता खत्म हो गई है। वहीं बीरगांव के एक स्कूल में वॉलीबॉल कोर्ट तक राखड़ से ढक गया है। बूढ़ापारा स्थित स्कूल में भी बच्चे बजरी वाले मैदान में ही प्रार्थना और अवकाश का समय बिताने को मजबूर हैं।
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विशेषज्ञों ने जताई चोट की आशंका School Ground Safety
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के लिए मिट्टी वाला मैदान सबसे सुरक्षित माना जाता है। मिट्टी पर गिरने से चोट का खतरा कम होता है, जबकि बजरी और गिट्टी वाले मैदान पर गिरने से गंभीर चोट लग सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूलों में खेल मैदानों का निर्माण और रखरखाव बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। बेहतर मैदान मिलने से विद्यार्थियों की खेल प्रतिभा को भी बढ़ावा मिलेगा।
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सुधार के लिए स्कूलों से मांगी जाएगी जानकारी
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी माना है कि बजरी और राखड़ वाले मैदान बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से उपयुक्त नहीं हैं। विभाग की ओर से स्कूलों से खेल मैदानों की स्थिति की जानकारी लेने और आवश्यक सुधार के निर्देश देने की बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता है, ताकि वे बिना किसी जोखिम के खेल गतिविधियों में भाग ले सकें।
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