सीजी भास्कर, 21 जुलाई : छत्तीसगढ़ के एक हजार से अधिक अतिथि शिक्षक संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान वेतन और मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन (Guest Teachers Protest) पर डटे हुए हैं। दुर्ग में हिंदी भवन के सामने पिछले 20 दिनों से धरना दे रहे शिक्षकों ने सोमवार को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव करने की कोशिश की। मंत्री से मुलाकात नहीं होने पर प्रदर्शनकारी पिछले 28 घंटे से उनके बंगले के बाहर डटे हुए हैं।
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बारिश में रैली, रातभर सड़क पर किया प्रदर्शन
अतिथि शिक्षकों ने बारिश के बीच रैली निकाली (Guest Teachers Protest) और शाम को फ्लैशलाइट जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। देर रात तक शिक्षक शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर सड़क पर ही बैठे रहे। प्रदर्शन के दौरान कई शिक्षक रेनकोट और छाता लेकर डटे रहे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मंत्री आवास के आसपास बैरिकेडिंग भी की गई।
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11 साल से पढ़ा रहे, फिर भी सिर्फ मानदेय पर सेवा
राज्य अतिथि शिक्षक संघ के हड़ताल प्रमुख एवं मुख्य संरक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव ने कहा कि प्रदेश के कई अतिथि शिक्षक पिछले 11 वर्षों से दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज भी वे केवल मानदेय पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें हर महीने लगभग 20 हजार रुपये मानदेय मिलता है, जिससे परिवार का खर्च, किराया, बिजली-पानी और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल हो जाता है।
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संविलियन या समायोजन पर ठोस निर्णय की मांग
धर्मेंद्र दास वैष्णव ने बताया कि उनकी पदस्थापना कोंडागांव जिले के केशकाल ब्लॉक के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में है, जहां वे पिछले 11 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षक अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि संविलियन या समायोजन (Guest Teachers Regularization) पर ठोस निर्णय चाहते हैं। उनका कहना है कि वे बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, लेकिन उनके अपने भविष्य को लेकर अब तक कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है।
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समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने आत्मानंद और विवेकानंद स्कूलों का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्षों से सेवाएं देने वाले विद्यामितान और अतिथि शिक्षकों के लिए भी समान कार्य के बदले समान वेतन और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि नियमित सेवाओं के अनुरूप सम्मानजनक वेतन और भविष्य की सुरक्षा चाहते हैं।
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पहले खून से लिखा था पत्र Guest Teachers Protest
इससे पहले भी अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की थी। अब आंदोलन के 20 दिन पूरे होने के बाद शिक्षक सीधे मंत्री आवास पहुंचकर सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। इधर, दुर्ग पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विद्यामितान और अतिथि शिक्षकों के मामले में कहा कि इस संबंध में जो उचित होगा, वह निर्णय लिया जाएगा।



