सीजी भास्कर, 23 जुलाई : छत्तीसगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने वेतनमान से जुड़े प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदेशभर में शांतिपूर्ण रैली निकाली। छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के आह्वान पर सभी जिलों में कार्यरत अधिकारियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए वेतनमान पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। (CHO Salary Issue)
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3700 से अधिक अधिकारियों को उचित वेतनमान नहीं मिलने का आरोप
संघ ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि राज्य स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय द्वारा वेतनमान संशोधन को मंजूरी दिए जाने, स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश और भारत सरकार के प्रचलित दिशा-निर्देशों के बावजूद केंद्र सरकार को अलग प्रस्ताव भेजा गया। इसके कारण प्रदेश के 3700 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी आज भी संशोधित वेतनमान (CHO Salary Issue) का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
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केंद्र की गाइडलाइन का दिया हवाला : CHO Salary Issue
संघ के अनुसार आयुष्मान भारत–हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की संचालन गाइडलाइन में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए प्रतिमाह 25 हजार रुपये निश्चित मानदेय और कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है। वहीं राज्य स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय ने भी वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना में वेतनमान पुनर्निर्धारण के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बावजूद भारत सरकार को पूर्ववत वेतनमान का प्रस्ताव भेजे जाने पर संघ ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
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आरटीआई दस्तावेजों के आधार पर उठाए सवाल
संघ का दावा है कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज, शासी निकाय की बैठक के कार्यवृत्त और भारत सरकार के रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार ने राज्य से भेजे गए प्रस्ताव को ही स्वीकृति दी थी। ऐसे में संशोधित वेतनमान लागू नहीं होने की वजह राज्य स्तर से अनुमोदित प्रस्ताव नहीं भेजा जाना प्रतीत होता है। संघ का कहना है कि यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है तो यह शासन के निर्णयों की अवहेलना और प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर मामला होगा।
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मुख्यमंत्री से की पांच प्रमुख मांगें
संघ ने मुख्यमंत्री से मुख्य सचिव या किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने। जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई करने। अनुपूरक पीआईपी के माध्यम से संशोधित प्रस्ताव भारत सरकार को दोबारा भेजने। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का वेतनमान पुनर्निर्धारित कर बकाया अंतर राशि का भुगतान करने। भविष्य में शासन के अनुमोदित निर्णयों में अनधिकृत बदलाव रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
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संघ बोला- अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन CHO Salary Issue
संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शासन के विधिवत निर्णयों के सम्मान, प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदेश के हजारों सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस मामले में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेकर न्याय सुनिश्चित करेंगे।
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