सीजी भास्कर, 23 जुलाई : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सात साल पुराने आत्महत्या के लिए उकसाने (Suicide Abetment Case) के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के बरी करने के आदेश को पलट दिया है। जस्टिस एनके ब्यास की एकलपीठ ने माना कि आरोपी युवक की लगातार प्रताड़ना, शादी का दबाव और धमकियों के कारण युवती मानसिक रूप से इस कदर परेशान हो गई थी कि उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। अदालत ने आरोपी मो. सेराज को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत दोषी करार दिया है। सजा के बिंदु पर सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
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2018 में कमरे में फंदे से लटका मिला था शव
मामला कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र का है। 29 जनवरी 2018 की रात युवती खाना खाने के बाद अपने कमरे में सोने गई थी। अगली सुबह उसकी मां रुकनी बाई ने कमरे का दरवाजा खोला तो बेटी का शव स्कार्फ के फंदे से पाइप पर लटका मिला। जांच के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट और मोबाइल फोन मिला, जिसके आधार पर मां की शिकायत पर मो. सेराज के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
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शादी का दबाव और लगातार धमकियां
पुलिस जांच और ट्रायल के दौरान सामने आया कि आरोपी युवती से एकतरफा प्रेम करता था और लगातार शादी करने का दबाव बना रहा था। युवती के इंकार करने पर वह उसे और उसकी मां को जान से मारने की धमकियां देता था। अदालत ने माना कि आरोपी की लगातार प्रताड़ना आत्महत्या के लिए उकसाने (Suicide Abetment Case) की श्रेणी में आती है।
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पहले भी कर चुकी थी आत्महत्या का प्रयास
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि मई 2017 में प्रताड़ना से तंग आकर युवती ने अपने हाथ की नस काटकर आत्महत्या का प्रयास किया था। उसका अस्पताल में इलाज कराया गया था। वहीं मानसिक तनाव के कारण उसकी मां ने भी नींद की गोलियां खा ली थीं। गांव के सरपंच, पंच और पुलिस द्वारा समझाइश दिए जाने के बावजूद आरोपी की हरकतों में कोई बदलाव नहीं आया।
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हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
कोरबा की सत्र अदालत ने वर्ष 2019 में पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने और सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग की विशेषज्ञ जांच नहीं होने का हवाला देते हुए आरोपी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में साक्ष्यों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। अदालत ने माना कि मृतका की मां की गवाही, मेडिकल साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाण आरोपी के खिलाफ पर्याप्त हैं। ऐसे में केवल हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की रिपोर्ट के अभाव में पूरे मामले को कमजोर नहीं माना जा सकता।
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27 जुलाई को तय होगी सजा
हाई कोर्ट ने आरोपी मो. सेराज को आईपीसी की धारा 306 के तहत दोषी ठहराते हुए सजा निर्धारित करने के लिए 27 जुलाई की तारीख तय की है। अदालत ने आरोपी या उसके अधिवक्ता को उस दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
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