सीजी भास्कर, 25 जुलाई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat Message) ने नई पीढ़ी को लेकर एक बेहद अहम संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को केवल आदेश देने की बजाय उनसे संवाद करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युवाओं को हर बात का कारण और तर्क समझाना होगा, ताकि उनमें सही सोच और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।
इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल शक्ति या दबाव के आधार पर किसी को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके विपरीत, विश्वास, अपनापन और बातचीत के माध्यम से ही रिश्ते मजबूत होते हैं।
नई पीढ़ी हर बात का जवाब चाहती है Mohan Bhagwat Message
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पहले के समय से काफी अलग है, क्योंकि वह हर विषय पर सवाल करती है और जवाब जानना चाहती है। इसलिए, युवाओं को किसी बात के लिए केवल आदेश देना सही तरीका नहीं है, बल्कि उन्हें उस निर्णय के पीछे की वजह समझानी चाहिए। वास्तव में, जब युवाओं को किसी विषय की पूरी जानकारी मिलती है, तब वे उसे बेहतर तरीके से स्वीकार करते हैं।
आदेश नहीं, डिस्कशन से मिलेगी सही दिशा
भागवत (Mohan Bhagwat Message) ने जोर देकर कहा कि आज के समय में ‘डिक्टेशन’ की जगह ‘डिस्कशन’ की जरूरत है। चूंकि केवल निर्देश देने से युवाओं को लंबे समय तक जोड़ा नहीं जा सकता, इसलिए बातचीत के माध्यम से उनकी सोच को समझना होगा। परिणामस्वरूप, इससे परिवार और समाज के बीच विश्वास बढ़ेगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को समय देना होगा और उनकी परेशानियों को सुनना होगा, तभी उन्हें सही मार्ग दिखाया जा सकता है।
ताकत के बल पर नहीं बनाया जा सकता भरोसा
RSS प्रमुख ने कहा कि यह सोच बिल्कुल गलत है कि ताकत के आधार पर कोई व्यक्ति सबका मालिक बन सकता है। इसके बजाय, समाज की व्यवस्था सहयोग और विश्वास से चलती है। इसलिए, मनमानी करने की बजाय सभी के विचारों को समझना आवश्यक है। इसके साथ-साथ, उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते में सम्मान सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि सम्मान मिलने पर ही लोग बेहतर तरीके से जुड़ते हैं।
समय बदला है, इसलिए सोच भी बदलनी होगी
पुराने समय का उदाहरण देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि पहले माता-पिता का निर्णय अंतिम माना जाता था और बच्चे बिना सवाल किए उसे स्वीकार कर लेते थे। हालांकि, आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। चूंकि नई पीढ़ी कारण जाने बिना किसी बात को स्वीकार नहीं करती, इसलिए बदलते समय के साथ परिवारों को भी अपनी बातचीत का तरीका बदलना होगा। उदाहरण के लिए, केवल अधिकार जताने से दूरी बढ़ सकती है; इसके बजाय बच्चों के साथ मित्र की तरह व्यवहार करना होगा।
परिवारों में घटता संवाद चिंता का विषय
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज कई परिवारों में लोग एक साथ रहते हुए भी कम बातचीत करते हैं। नतीजतन, इसका सीधा असर बच्चों और युवाओं के व्यवहार पर पड़ता है। इसीलिए, माता-पिता को बच्चों के लिए समय निकालना चाहिए और उनके साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए।
डिस्कशन से ही बनेगा बेहतर समाज
अंत में, मोहन भागवत (Mohan Bhagwat Message) ने कहा कि नई पीढ़ी को सबसे ज्यादा अपनापन, सम्मान और विश्वास चाहिए। विशेष रूप से, उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मुद्दे को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। संक्षेप में कहें तो, आज समाज को आदेश देने वाली व्यवस्था से आगे बढ़कर युवाओं के सवालों को सुनना होगा, ताकि बातचीत के माध्यम से एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके।



