सीजी भास्कर, 26 जुलाई : पिछले चार दशकों में हवाई यात्रा (Air Travel) पहले से अधिक सुलभ और किफायती हुई है, लेकिन इसके साथ ही इकोनॉमी क्लास में यात्रियों के लिए उपलब्ध जगह लगातार कम होती गई है। एयरलाइंस ने अधिक यात्रियों को समायोजित करने के लिए सीटों के आकार और उनके बीच की दूरी घटा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव का असर यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
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40 साल में लगातार कम हुई सीटों के बीच की दूरी
जानकारी के अनुसार, 1980 और 1990 के दशक में इकोनॉमी क्लास में सीट पिच (दो सीटों के बीच की दूरी) लगभग 34 से 35 इंच होती थी। अब अधिकांश एयरलाइंस में यह घटकर 30 से 31 इंच रह गई है, जबकि लो-कॉस्ट एयरलाइंस में यह दूरी 28 से 29 इंच तक सिमट चुकी है।
इसी तरह सीटों की चौड़ाई भी पहले की तुलना में कम हो गई है, जबकि इस दौरान यात्रियों की औसत शारीरिक बनावट पहले से अधिक बड़ी हुई है।
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एक ही विमान में बढ़ा दी गई सीटों की संख्या
एयरलाइंस अब पतली और हल्की सीटों का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे एक ही विमान में अधिक यात्रियों को बैठाया जा सके। उदाहरण के तौर पर, जहां पहले बोइंग 737 विमान में करीब 120 से 130 सीटें होती थीं, वहीं अब उसी मॉडल में 180 से 190 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इसी तरह एयरबस A320 में भी सीटों की संख्या बढ़ाई गई है।
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अतिरिक्त लेगरूम बना कमाई का जरिया
आज अतिरिक्त लेगरूम वाली सीटें एयरलाइंस के लिए कमाई का नया माध्यम बन चुकी हैं। घरेलू उड़ानों में ऐसी सीटों के लिए अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इसकी कीमत और अधिक होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइंस टिकट का मूल किराया कम रखकर आरामदायक सीटों के नाम पर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।
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सुरक्षा को लेकर भी उठ रहे सवाल
विशेषज्ञों के अनुसार सीटों के आकार में कमी का मुख्य कारण व्यावसायिक लाभ है। कम जगह में अधिक यात्रियों को बैठाकर एयरलाइंस परिचालन लागत घटाने और राजस्व बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं।
हालांकि उनका मानना है कि अत्यधिक भरे हुए विमानों में आपात स्थिति के दौरान यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भविष्य में खड़े होकर यात्रा का कॉन्सेप्ट Air Travel
इसी बीच भविष्य की हवाई यात्रा को लेकर एक नया कॉन्सेप्ट भी चर्चा में है। इटली की एक कंपनी ने ‘स्टैंडिंग-स्टाइल’ सीट का डिजाइन विकसित किया है, जिसमें यात्री पूरी तरह बैठने के बजाय सहारे के साथ खड़े रहने जैसी स्थिति में यात्रा करेगा।
कंपनी का दावा है कि इस व्यवस्था से विमान में करीब 20 प्रतिशत अधिक यात्रियों को समायोजित किया जा सकता है। हालांकि अभी तक किसी प्रमुख एयरलाइन ने इस मॉडल को व्यावसायिक रूप से लागू नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में बजट एयरलाइंस इस तरह के प्रयोग कर सकती हैं।
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