सीजी भास्कर, 2 अगस्त : छत्तीसगढ़ के नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों (Medical College Faculty Crisis ) में फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग पुराने मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों को पदोन्नति देकर नए संस्थानों में पदस्थ करने की योजना बना रहा है। इसके तहत 70 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसरों को एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रमोशन दिया जाएगा।
इससे पहले 64 एसोसिएट प्रोफेसरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया जा चुका है। अब विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया पूरी हो गई है और अगले सप्ताह पदोन्नति के साथ स्थानांतरण आदेश जारी होने की संभावना है।
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सीधी भर्ती में नहीं मिली अपेक्षित सफलता
नए मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भर्ती के लिए सीधी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन इसमें विभाग को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। नए मेडिकल कॉलेजों के लिए प्रोफेसर के 35 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, लेकिन केवल सात अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। इसके बाद रिक्त पदों को भरने के लिए पुराने मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टरों को पदोन्नति देकर भेजने का निर्णय लिया गया है।
पीजी सीटों पर पड़ सकता है असर
डॉक्टरों के स्थानांतरण से पुराने मेडिकल कॉलेजों की पीजी सीटों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वरिष्ठ डॉक्टरों के जाने से कुछ विभागों में मान्यता और सीटों को बनाए रखने में चुनौती आ सकती है।
रायपुर मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में एकमात्र प्रोफेसर के स्थानांतरण की स्थिति में तीन पीजी सीटों पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं मेडिसिन विभाग से तीन प्रोफेसरों के तबादले की स्थिति में मौजूदा 15 पीजी सीटों को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
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पुराने मेडिकल कॉलेजों में भी बढ़ेगी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से नए मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी तो दूर होने की उम्मीद है, लेकिन पुराने संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। प्रदेश के अन्य पुराने मेडिकल कॉलेजों में भी इसी तरह की स्थिति बनने की संभावना जताई जा रही है।
स्थायी नियुक्ति मॉडल पर भी हो रही चर्चा
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सीधी भर्ती से पर्याप्त फैकल्टी नहीं मिल पा रही है, इसलिए पदोन्नति और स्थानांतरण का विकल्प अपनाया जा रहा है। वहीं विशेषज्ञों ने मध्य प्रदेश के मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति एक ही मेडिकल कॉलेज में होने से फैकल्टी की समस्या कम होती है। छत्तीसगढ़ में बार-बार स्थानांतरण और संविदा नियुक्तियों के कारण डॉक्टरों की उपलब्धता और नौकरी की सुरक्षा प्रभावित होती है।



