सीजी भास्कर, 29 अगस्त : छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा (Chhattisgarh Higher Education) अब केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रह गई है। राज्य में कौशल, तकनीक, अनुसंधान और रोजगार से जोड़कर शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना के अनुरूप सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, हुनरमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
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गुणवत्ता सुधार के लिए शुरू हुआ मिशन मोड
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन की नींव रखी गई है। इसके तहत चयनित महाविद्यालयों के ढांचागत और शैक्षणिक विकास के लिए हर साल विशेष राशि स्वीकृत की जाएगी। साथ ही मजबूत मॉनिटरिंग व्यवस्था तैयार की गई है, ताकि स्वीकृत बजट का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंच सके।
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36 महाविद्यालय बनेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप राज्य के हर जिले में बहुसंकायी और अनुसंधान केंद्रित शिक्षण संस्थान विकसित करने की योजना है। जिन महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 3000 से अधिक है और प्रदर्शन बेहतर रहा है, उन्हें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। ऐसे 36 महाविद्यालय शोध, नवाचार और उच्चस्तरीय अध्यापन के प्रमुख केंद्र बनेंगे।
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AI से लेकर फूड प्रोसेसिंग तक रोजगारपरक पाठ्यक्रम
विद्यार्थियों को बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए स्ववित्तीय पाठ्यक्रम नीति लागू की जा रही है। इसके तहत स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स, सेरीकल्चर, फिशरीज और टसर टेक्नोलॉजी जैसे विषयों की पढ़ाई शुरू की जा रही है।
इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग, फूड प्रोसेसिंग, मशरूम कल्टीवेशन, फ्लोरीकल्चर और हर्बल कल्टीवेशन जैसे विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ-साथ राज्य के कौशल विकास और तकनीकी विभागों के साथ MoU किए हैं, ताकि विद्यार्थियों को उद्योग और व्यावहारिक अनुभव से जोड़ा जा सके।
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वनांचल तक पहुंचेगी उच्च शिक्षा
शिक्षा का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों में नए महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। औद्योगिक प्रतिष्ठानों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाकर युवाओं के लिए इंटर्नशिप और प्लेसमेंट के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा चार वर्षीय बीएड (ITEP) और बीपीएड जैसे एकीकृत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का संचालन भी शुरू किया जा रहा है।
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595 पदों पर प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया तेज
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए शिक्षक तंत्र को भी मजबूत किया जा रहा है। उद्योग जगत और व्यावहारिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में महाविद्यालयों से जोड़ने की योजना है। वहीं शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्यापक के 595 पदों पर सीधी भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा (Chhattisgarh Higher Education) के इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ कौशल, अनुसंधान और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इन पहलों के जरिए राज्य को देश के प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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