सीजी भास्कर, 15 सितंबर : यूपीआई पर फीस का मुद्दा (UPI Fees Rahul Gandhi) एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार अब यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल रही है। उन्होंने इस मुद्दे को अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते से जोड़ते हुए सरकार की नीति और फैसलों पर सवाल उठाए हैं।
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राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए दावा किया कि अब 2,000 रुपए से ज्यादा के व्यापारी भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की संभावना है। उनके मुताबिक ऐसे भुगतान यूपीआई के कुल लेन-देन की संख्या में करीब 5 प्रतिशत हैं, लेकिन इनसे होने वाले कुल धन के लेन-देन में इनकी हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत है। हालांकि, ये आंकड़े और शुल्क लागू होने की स्थिति उनके बयान के संदर्भ में हैं।
ग्राहक पर कैसे पड़ेगा असर?
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार भले ही ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लेने की बात करे, लेकिन यदि दुकानदारों से शुल्क वसूला गया (UPI Fees Rahul Gandhi) तो उसका असर आगे ग्राहकों पर पड़ सकता है। उनका तर्क है कि व्यापारी अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए सामान और सेवाओं की कीमत बढ़ा सकते हैं।
ऐसे में यूपीआई से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर सीधे शुल्क नहीं लगने के बावजूद अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका हो सकती है। राहुल गांधी ने इसी संभावित असर को लेकर सरकार से सवाल उठाए हैं।
अमेरिकी कंपनियों को लेकर सवाल
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यूपीआई पर शुल्क लगाने का मुद्दा (UPI Fees Rahul Gandhi) अमेरिकी भुगतान कंपनियों की उस मांग से जुड़ा है, जिसमें भारत की शून्य शुल्क व्यवस्था का विरोध किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि इस व्यवस्था में बदलाव करती है तो इसका सीधा असर देश में डिजिटल भुगतान की लागत और कारोबारियों पर पड़ सकता है।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य शुल्क व्यवस्था का विरोध करती रही हैं। इसी आधार पर राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार अमेरिकी दबाव के आगे झुक रही है।
व्यापार समझौते से जोड़ा मुद्दा
राहुल गांधी ने अमेरिकी व्यापार समझौते को लेकर आरोप (UPI Fees Rahul Gandhi) लगाते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिकी दबाव के सामने झुकने का आरोप लगाया। हालांकि, यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है और सरकार की ओर से इस दावे की पुष्टि इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
यूपीआई को भारत में डिजिटल भुगतान का बड़ा माध्यम माना जाता है। ऐसे में व्यापारी भुगतान पर शुल्क की किसी भी संभावित व्यवस्था का असर छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े व्यापारियों तक पड़ सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर राहुल गांधी के बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।
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यूपीआई शुल्क पर सियासत तेज
राहुल गांधी ने यूपीआई भुगतान शुल्क को लेकर सवाल (UPI Fees Rahul Gandhi) उठाते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग जैसा राजनीतिक संदेश दिया है। उनका कहना है कि यदि शुल्क का बोझ कारोबारियों पर डाला गया तो अंततः इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
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फिलहाल इस पूरे मामले में राहुल गांधी के आरोप सामने आए हैं। सरकार की ओर से इस आरोप और अमेरिकी व्यापार समझौते से यूपीआई शुल्क को जोड़ने के दावे पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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