सीजी भास्कर, 16 सितंबर। छत्तीसगढ़ में चिकित्सा और पैरामेडिकल शिक्षा की व्यवस्था को लेकर विवाद सामने (Chhattisgarh Medical Education) आया है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आयुष विश्वविद्यालय के नियंत्रण से इन पाठ्यक्रमों को हटाकर निजी विश्वविद्यालयों को सौंपने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर पूरी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

फीस और विद्यार्थियों को लेकर चिंता Chhattisgarh Medical Education
महंत ने कहा कि व्यवस्था में बदलाव का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, फीस और डिग्री की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका बढ़ने से उच्च शिक्षा महंगी हो सकती है, जिसका असर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर पड़ने की आशंका है।
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परीक्षा और डिग्री की साख पर सवाल
महंत के अनुसार, अलग-अलग संस्थानों के जरिए चिकित्सा और पैरामेडिकल पाठ्यक्रम संचालित होने से परीक्षा व्यवस्था में दोहराव और डिग्री की मान्यता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि आयुष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद भी इन पाठ्यक्रमों को निजी विश्वविद्यालयों को सौंपने के प्रस्ताव पर असहमति जता चुकी है। इसके बावजूद प्रक्रिया आगे बढ़ने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
महंत ने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करते हुए प्रक्रिया पर रोक लगाने और मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने के निर्देश देने का आग्रह किया है।
वहीं, राज्य में आयुष पाठ्यक्रमों के लिए 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया जारी है। बीएएमएस, बीएचएमएस और बीएनवाईएस की काउंसलिंग से जुड़ी सूचनाएं आधिकारिक स्तर पर जारी की गई हैं।
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