सीजी भास्कर, 23 सितंबर : खेती के पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर जल संरक्षण और मछली पालन (Fish Farming Success) को आजीविका का जरिया बनाने वाले सारंगढ़ विकासखंड के नवरंगपुर निवासी गुलाब पटेल ने नई मिसाल कायम की है। महज 0.40 हेक्टेयर भूमि पर तालाब बनाकर वे हर साल करीब 250 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रहे हैं।
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1.20 लाख रुपये के अनुदान से बना तालाब
गुलाब पटेल के पास 0.40 हेक्टेयर जमीन थी। उन्होंने इस भूमि का उपयोग तालाब निर्माण के लिए करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत उन्हें विभाग की ओर से 1.20 लाख रुपये का अनुदान मिला। शासकीय सहायता और विभागीय मार्गदर्शन से तालाब का निर्माण पूरा हुआ। इसके बाद गुलाब पटेल ने वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन (Fish Farming Success) शुरू किया और नियमित देखरेख के साथ इसे अपनी आय का प्रमुख जरिया बनाया।
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हर साल 250 क्विंटल मछली का उत्पादन
तालाब बनने के बाद गुलाब पटेल ने मछली पालन में बेहतर आहार, नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन को अपनाया। इसका असर उत्पादन पर भी दिखाई दिया। वर्तमान में 0.40 हेक्टेयर के जलक्षेत्र से हर साल करीब 250 क्विंटल मछली का उत्पादन हो रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार तमाम लागत निकालने के बाद उन्हें सालाना 10 से 15 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ मिल रहा है।
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छोटी जमीन से आत्मनिर्भरता की बड़ी मिसाल
गुलाब पटेल की सफलता (Fish Farming Success) यह दिखाती है कि सीमित भूमि का बेहतर प्रबंधन कर किसान अपनी आय के नए रास्ते खोल सकते हैं। पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन को अपनाकर उन्होंने अपने उपलब्ध संसाधन का उपयोग किया। उनकी इस पहल से गांव के दूसरे किसानों और युवाओं को भी कृषि के साथ जुड़े वैकल्पिक व्यवसायों की संभावनाएं समझने का अवसर मिल रहा है।
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सेवा संकल्प अभियान से मिला प्रोत्साहन
गुलाब पटेल की कहानी सेवा संकल्प अभियान के उस उद्देश्य से भी जुड़ी है, जिसमें शासकीय योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाकर उनकी आजीविका को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता, विभागीय मार्गदर्शन और किसान की मेहनत के मेल से 0.40 हेक्टेयर भूमि आर्थिक गतिविधि के केंद्र में बदल गई।
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योजना, मेहनत और सही प्रबंधन से बढ़ी आय
गुलाब पटेल का कहना है कि तालाब निर्माण के बाद मछली पालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हुई। उनका अनुभव (Fish Farming Success) यह बताता है कि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से उपयोग कर किसान अपनी पारंपरिक आय के साथ नए स्रोत भी विकसित कर सकते हैं। आज उनका तालाब केवल मछली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का उदाहरण बन गया है।
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