सीजी भास्कर, 06 अक्टूबर। त्योहारी सीजन शुरू होते ही ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ (Train Waiting) गई है। दुर्ग, रायपुर और आसपास के स्टेशनों से अलग-अलग शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को कंफर्म टिकट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई ट्रेनों में वेटिंग काफी आगे पहुंच गई है, जबकि कुछ में नो-रूम की स्थिति बनी हुई है।
हरिद्वार, कामाख्या, वाराणसी और मुंबई जैसे प्रमुख रूटों पर ज्यादा दबाव देखने को मिल रहा है। सीधी ट्रेन नहीं होने से यात्रियों को दूसरे स्टेशन से ट्रेन पकड़ने की मजबूरी भी है। इस समस्या को देखते हुए दुर्ग सांसद विजय बघेल ने रेल मंत्री को पत्र भेजकर नई ट्रेनें शुरू करने और कुछ मौजूदा सेवाओं को नियमित करने की मांग की है।

हरिद्वार के लिए बिलासपुर जाना पड़ रहा Train Waiting
दुर्ग और रायपुर से हरिद्वार के लिए सीधी नियमित ट्रेन नहीं होने के कारण यात्रियों को पहले बिलासपुर पहुंचना पड़ता है। यहां से उत्कल एक्सप्रेस के जरिए हरिद्वार जाना होता है।
यात्रियों का कहना है कि दुर्ग से बिलासपुर पहुंचने में ही करीब दो घंटे लग जाते हैं। इसके बाद ट्रेन पकड़ने के लिए अतिरिक्त समय के साथ स्थानीय परिवहन का खर्च भी बढ़ जाता है। परिवार के साथ सफर करने वाले यात्रियों, बुजुर्गों और महिलाओं को इससे ज्यादा परेशानी होती है।
दुर्ग-हरिद्वार स्पेशल को नियमित करने से यात्रियों को सीधे सफर की सुविधा मिल सकती है।
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कामाख्या और वाराणसी रूट पर लंबी वेटिंग
कामाख्या जाने वाले यात्रियों के लिए कर्मभूमि एक्सप्रेस प्रमुख ट्रेन है, लेकिन साप्ताहिक संचालन के कारण इसमें यात्रियों का दबाव ज्यादा रहता है। मौजूदा समय में स्लीपर और एसी श्रेणी में नो-रूम की स्थिति बताई जा रही है।
वाराणसी जाने वाली ट्रेनों में भी कंफर्म टिकट के लिए लंबी वेटिंग चल रही है। वहीं दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन संचालित होती है। ऐसे में यात्रियों को यात्रा की तारीख बदलने या दूसरे साधनों का सहारा लेने की स्थिति बन रही है।
नई ट्रेनों के साथ मौजूदा सेवाओं के विस्तार की मांग
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने दुर्ग-अमृतसर ट्रेन, दुर्ग-बनारस वंदे भारत और कामाख्या-दुर्ग अमृत भारत एक्सप्रेस शुरू करने की मांग की है। इसके अलावा दुर्ग-अंबिकापुर इंटरसिटी और कोरबा-रायपुर इंटरसिटी को दुर्ग तक बढ़ाने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस को रोज चलाने के साथ दुर्ग-हरिद्वार और दुर्ग-सुल्तानपुर स्पेशल को नियमित करने की मांग भी की गई है। इन सेवाओं के विस्तार से प्रमुख रूटों पर यात्रियों का दबाव कम होने और कंफर्म टिकट की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
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नई ट्रेन से पहले रेलवे करता है क्षमता का आकलन
नई दुर्ग-हरिद्वार और दुर्ग-सुल्तानपुर स्पेशल शुरू करने से पहले रेलवे संबंधित रूट की लाइन क्षमता और समय की उपलब्धता की जांच करता है। इसके बाद रैक और कोच, पिट लाइन, रखरखाव की सुविधा, लोको पायलट और दूसरे कर्मचारियों की उपलब्धता देखी जाती है।
रेलवे ट्रैक, सिग्नल और विद्युत व्यवस्था की क्षमता के साथ यात्री मांग और संभावित उपयोगिता का भी आकलन करता है। संबंधित विभागों की रिपोर्ट और प्रस्ताव की व्यवहारिकता जांचने के बाद ही नई ट्रेन या सेवा विस्तार पर अंतिम फैसला लिया जाता है।
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