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Home » Noise Pollution Bill : 50 हजार जुर्माना देकर रातभर बजा सकेंगे DJ! कोलाहल विधेयक पर पर्यावरणविद् ने उठाए 10 सवाल

Noise Pollution Bill : 50 हजार जुर्माना देकर रातभर बजा सकेंगे DJ! कोलाहल विधेयक पर पर्यावरणविद् ने उठाए 10 सवाल

By Newsdesk Admin
13/10/2026
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Noise Pollution Bill : 50 हजार जुर्माना देकर रातभर बजा सकेंगे DJ! कोलाहल विधेयक पर पर्यावरणविद् ने उठाए 10 सवाल
Noise Pollution Bill : 50 हजार जुर्माना देकर रातभर बजा सकेंगे DJ! कोलाहल विधेयक पर पर्यावरणविद् ने उठाए 10 सवाल

सीजी भास्कर, 13 अक्टूबर : छत्तीसगढ़ में डीजे और लाउडस्पीकर के शोर पर लगाम लगाने के लिए प्रस्तावित कोलाहल नियंत्रण विधेयक 2026 का प्रारूप ही सवालों के घेरे में आ गया है। पर्यावरणविद् नितिन सिंघवी ने इसके 10 प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए गृह विभाग के प्रमुख सचिव और पुलिस विभाग को पत्र लिखा है। उनका सवाल है कि जब डीजे संचालकों की एक रात की कमाई लाखों रुपये तक हो सकती है, तो 50 हजार रुपये का जुर्माना उन्हें तेज आवाज में संगीत बजाने से कैसे रोकेगा? हालांकि, कोलाहल नियंत्रण विधेयक (Noise Pollution Bill) अभी प्रारूप के स्तर पर है और सरकार ने इस पर जनता से सुझाव मांगे हैं।

Contents
  • 50 हजार जुर्माने पर सवाल
  • साइलेंस जोन आधा करने पर आपत्ति
  • दिन में छह घंटे डीजे
  • हाई कोर्ट के आदेशों का मुद्दा
  • साइलेंस जोन में कौन शामिल
  • जेल की सजा पर सवाल
  • सरकार ने मांगे सुझाव

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50 हजार जुर्माने पर सवाल

प्रस्तावित प्रारूप में पहली बार नियम तोड़ने पर न्यूनतम 50 हजार रुपये और दूसरी बार एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। सिंघवी का तर्क है कि डीजे संचालकों की कमाई के मुकाबले यह दंड प्रभावी रोक साबित नहीं हो सकता। उन्होंने पहली बार उल्लंघन पर 5 लाख से 15 लाख रुपये और दूसरी बार 10 लाख से 15 लाख रुपये तक जुर्माना लगाने का सुझाव दिया है।

उनका कहना है कि जुर्माना इतना प्रभावी होना चाहिए कि संचालक नियम तोड़ने से पहले उसके आर्थिक परिणामों पर विचार करें। जुर्माने के प्रावधान (Noise Pollution Bill) को लेकर उठी यह आपत्ति अब विधेयक पर चर्चा का अहम मुद्दा बन गई है।

 

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साइलेंस जोन आधा करने पर आपत्ति

सिंघवी ने साइलेंस जोन की दूरी 200 मीटर से घटाकर 100 मीटर करने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाया है। उनके अनुसार, पुराने राज्य कानून में साइलेंस जोन के 200 मीटर के दायरे में लाउडस्पीकर बजाने पर रोक का प्रावधान था, जबकि नए प्रारूप में दूरी कम की गई है। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संवेदनशील स्थानों के आसपास शोर पर नियंत्रण जरूरी है। सिंघवी ने केंद्र के ध्वनि प्रदूषण नियमों और राज्य के प्रस्तावित प्रावधानों के बीच अंतर दूर करने की मांग की है। साइलेंस जोन की सीमा (Noise Pollution Bill) में बदलाव का वास्तविक असर अंतिम प्रावधान तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

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दिन में छह घंटे डीजे

प्रस्तावित प्रारूप में रैली, सार्वजनिक कार्यक्रम और उत्सवों के लिए अनुमति लेकर दिन में छह घंटे तक डीजे बजाने की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई गई है। सिंघवी के मुताबिक, सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक डीजे बजाने की छूट से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है।

उनका मानना है कि सार्वजनिक आयोजनों में शोर की अनुमति देते समय केंद्रीय ध्वनि प्रदूषण नियमों को ध्यान में रखना चाहिए। **डीजे बजाने की प्रस्तावित छूट (Noise Pollution Bill) **की समीक्षा करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा है कि नियमों का उद्देश्य तेज आवाज को नियंत्रित करना होना चाहिए।

 

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हाई कोर्ट के आदेशों का मुद्दा

सिंघवी ने वाहनों पर साउंड बॉक्स बजाने से जुड़े हाईकोर्ट के पुराने आदेशों के पालन पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2016 और 27 अप्रैल 2017 को वाहनों पर साउंड बॉक्स बजाने पर रोक से संबंधित निर्देश दिए थे।

सिंघवी का आरोप है कि इन निर्देशों का पिछले करीब 10 वर्षों में प्रभावी पालन नहीं हुआ। उनके मुताबिक, वाहन जब्त करने, दोबारा उल्लंघन पर परमिट निरस्त करने और संबंधित रिकॉर्ड रखने जैसी व्यवस्थाओं पर भी सवाल हैं। उन्होंने नए कानून में पुराने न्यायिक आदेशों के पालन की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

 

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साइलेंस जोन में कौन शामिल

सिंघवी ने साइलेंस जोन के अंतर्गत आने वाले संस्थानों की परिभाषा पर भी आपत्ति जताई है। उनके अनुसार, केंद्रीय नियमों में सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ नर्सिंग होम और क्लिनिक भी शामिल हैं। वहीं, प्रस्तावित राज्य विधेयक में अस्पताल, नर्सिंग होम, शैक्षणिक संस्थान, छात्रावास, न्यायालय और सरकारी कार्यालय जैसे संस्थानों का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों की परिभाषा स्पष्ट नहीं होने पर नियमों के दायरे को लेकर भ्रम हो सकता है। इसलिए विधेयक में सभी संबंधित संस्थानों को स्पष्ट रूप से शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।

 

 

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जेल की सजा पर सवाल

प्रस्तावित विधेयक में बार-बार उल्लंघन करने वालों के लिए सख्त दंड का प्रावधान भी चर्चा में है। सिंघवी के अनुसार, पुराने राज्य कानून में पहली बार उल्लंघन पर छह महीने और दूसरी बार एक साल तक की जेल का प्रावधान था। नए प्रारूप में दूसरी बार उल्लंघन पर दो साल तक कैद और बाद के अपराधों को गैर-जमानती बनाने का प्रस्ताव है। हालांकि, सिंघवी ने दंड के प्रावधानों के साथ उनके क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि राज्य गठन के बाद से डीजे संचालकों को जेल भेजने की कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि कानून में सख्त सजा का उल्लेख तभी प्रभावी होगा, जब उल्लंघन करने वालों पर वास्तव में कार्रवाई भी की जाए।

 

 

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सरकार ने मांगे सुझाव

छत्तीसगढ़ सरकार ने कोलाहल नियंत्रण विधेयक 2026 का प्रारूप जारी कर आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। सिंघवी ने जुर्माने की राशि, साइलेंस जोन की दूरी, सार्वजनिक आयोजनों में डीजे की अनुमति और हाईकोर्ट के आदेशों के पालन सहित 10 बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। अब यह देखना होगा कि सरकार इन सुझावों पर क्या रुख अपनाती है। विधेयक के अंतिम स्वरूप (Noise Pollution Bill) और उसके लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि नए प्रावधान ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण में कितने प्रभावी साबित होते हैं।

 

 

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