सीजी भास्कर, 4 अक्टूबर : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की पुनपल्ली ग्राम पंचायत में ग्राम सभा ने चर्च निर्माण और प्रार्थना सभा समेत अन्य चर्च संबंधी गतिविधियों के लिए ग्राम सभा की जमीन उपलब्ध नहीं कराने का प्रस्ताव पारित किया है। ग्राम सभा का फैसला (Sukma Gram Sabha Decision) 2 अक्टूबर को हुई बैठक में लिया गया। प्रस्ताव में ईसाई धर्मावलंबियों और धर्मांतरित लोगों के शव दफनाने के लिए भी गांव में जमीन नहीं देने की बात कही गई है।
ग्राम पंचायत के सूचना पटल पर भी ग्राम सभा के निर्णय की जानकारी प्रदर्शित की गई है। इसमें पादरी और ईसाई धर्म प्रचारकों के धर्मांतरण, प्रार्थना सभा और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए गांव में प्रवेश पर आपत्ति दर्ज की गई है।
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पेसा कानून और पारंपरिक व्यवस्था का हवाला
ग्राम सभा ने अपने प्रस्ताव के आधार के रूप में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 का हवाला दिया है। प्रस्ताव में गांव की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक विरासत को संरक्षित रखने की बात कही गई है। पुनपल्ली ग्राम सभा का प्रस्ताव (Sukma Gram Sabha Decision) इसी पारंपरिक व्यवस्था और सामुदायिक हितों के संदर्भ में लिया गया बताया गया है।
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सूचना पटल पर दर्ज किया गया निर्णय
ग्राम सभा के फैसले को सार्वजनिक करने के लिए पंचायत भवन में सूचना पटल लगाया गया है। इसमें धर्म प्रचारकों की ओर से धर्मांतरण, प्रार्थना सभा और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए गांव में प्रवेश को लेकर आपत्ति का उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा में सरपंच सोनमती माड़वी, ग्राम अध्यक्ष बारसे सोमा, उपसरपंच मुचकी नंदा, ग्राम पटेल बारसे पांडु, पूर्व सरपंच मीडियम जोगा, वार्ड पंच पोडियम भीमा, ग्राम पुजारी बारसे मल्ला और जनपद सदस्य मड़कम भीमा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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सामाजिक एकता का दिया तर्क
जनपद सदस्य मड़कम भीमा के अनुसार, ग्राम सभा में लिया गया सुकमा ग्राम सभा निर्णय (Sukma Gram Sabha Decision) पारंपरिक व्यवस्था, सामाजिक एकता और सामुदायिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। ग्राम सभा ने गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था को बनाए रखने पर जोर दिया है। प्रस्ताव में धार्मिक गतिविधियों और धर्मांतरण से जुड़े मामलों को लेकर ग्रामीणों की आपत्तियों को दर्ज किया गया है।
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धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम का भी जिक्र
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण से संबंधित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 लागू हो चुका है। इस कानून के तहत अवैध धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में शिकायत, जांच, अनुमति और कार्रवाई की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। राज्य सरकार के अनुसार, कानून का उद्देश्य अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाना और इससे जुड़े मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
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बस्तर में पहले भी उठता रहा है मुद्दा
छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण को लेकर पहले भी विवाद और सामाजिक बहस सामने आती रही है। बस्तर, जशपुर और रायगढ़ समेत कई क्षेत्रों में धार्मिक गतिविधियों और धर्मांतरण को लेकर स्थानीय स्तर पर मतभेद देखने को मिले हैं। सुकमा ग्राम सभा का निर्णय (Sukma Gram Sabha Decision) भी इसी व्यापक मुद्दे के बीच सामने आया है। हालांकि ग्राम सभा के प्रस्ताव और उसके कानूनी प्रभाव को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी।
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