सीजी भास्कर, 18 अक्टूबर : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी (Project Aangan Lakshmi) शुरू किया जा रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत शुरू होने वाली इस पहल में महिलाओं को बकरीपालन, देशी मुर्गीपालन और डेयरी जैसे पशुपालन आधारित व्यवसायों से जोड़ा जाएगा। परियोजना के पहले चरण में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 100 महिला पशु उद्यमियों की इकाइयां स्थापित की जाएंगी। आगे वित्तीय वर्ष 2027-28 में 500 अतिरिक्त इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य है।
पहले चरण में 100 इकाइयां
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा के निर्देशन में प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी (Project Aangan Lakshmi) की शुरुआत की जाएगी। इसका उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पशु उद्यमी के रूप में विकसित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। परियोजना के माध्यम से महिलाओं की आय के साधनों का विस्तार करने के साथ परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
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खेती के साथ अतिरिक्त आय
धमतरी जिले के कई ग्रामीण परिवार कृषि और मौसमी मजदूरी पर निर्भर हैं। धान की एक प्रमुख फसल, सीमित रोजगार और मौसम व बाजार की अनिश्चितताओं के कारण सालभर नियमित आय बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में बकरीपालन, देशी मुर्गीपालन और डेयरी जैसे व्यवसाय अतिरिक्त आय के साधन बन सकते हैं। प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी (Project Aangan Lakshmi) के जरिए स्थानीय संसाधनों के उपयोग और महिलाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देने की योजना है।
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दो चरणों में 600 इकाइयां
यह पहल छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करेगी। परियोजना में विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के अभिसरण की भी परिकल्पना की गई है। पहले चरण में 2026-27 के दौरान चयनित संकुलों में 100 इकाइयां पायलट परियोजना के रूप में स्थापित होंगी। इसके बाद 2027-28 में 500 अतिरिक्त इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य है। इस तरह दोनों चरणों में कुल 600 महिला पशु उद्यमी इकाइयां विकसित करने की योजना है। प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी (Project Aangan Lakshmi) के पहले चरण से मिले अनुभवों के आधार पर आगे की गतिविधियों को विस्तार दिया जाएगा।
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वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन
परियोजना के तहत महिलाओं को उन्नत और वैज्ञानिक पद्धतियों से बकरीपालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। देशी मुर्गीपालन को भी आजीविका के एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। पशुओं के पोषण, नियमित टीकाकरण, बीमा और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की योजना है, ताकि पशुधन की सुरक्षा के साथ व्यवसाय की आर्थिक व्यवहार्यता भी बनी रहे।
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जैविक खाद से अतिरिक्त कमाई
पशुपालन से प्राप्त गोबर और अन्य जैविक संसाधनों से खाद तैयार करने, उसके संग्रहण और विक्रय को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और महिलाओं के लिए कमाई के अतिरिक्त अवसर विकसित होंगे। परियोजना में उत्पादों की बिक्री के लिए बायबैक व्यवस्था के जरिए बाजार से जुड़ाव सुनिश्चित करने की परिकल्पना की गई है। प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी (Project Aangan Lakshmi) के तहत बाजार तक पहुंच और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से महिला उद्यमियों को अपने व्यवसाय व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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आत्मनिर्भरता की ओर कदम
परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागीय समन्वय, महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी और आजीविका गतिविधियों की निरंतरता पर ध्यान दिया जाएगा। महिलाओं को पशुपालन संबंधी जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ाव उपलब्ध कराने की योजना है। प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी (Project Aangan Lakshmi) का उद्देश्य महिलाओं को आय अर्जित करने के अवसर देने के साथ आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी और आत्मविश्वास बढ़ाना भी है। योजना के सफल क्रियान्वयन से ग्रामीण परिवारों की आय में विविधता लाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और महिला उद्यमिता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
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