सीजी भास्कर, 07 जुलाई : कभी हिंसा और भय के माहौल में जीवन बिताने वाले सुकमा के पुनर्वासित युवा अब आत्मनिर्भरता की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं। हाथों में बंदूक की जगह अब वाहन की स्टेयरिंग है और आंखों में बेहतर भविष्य के सपने। जिला प्रशासन और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) की पहल से 31 पुनर्वासित युवा एलएमवी ऑनर ड्राइवर प्रशिक्षण (Driving Training) लेकर सम्मानजनक रोजगार और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह पहल न केवल उनके जीवन में बदलाव ला रही है, बल्कि समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का भी प्रभावी माध्यम बन रही है।
13 जून से 12 जुलाई तक चल रहे 30 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में युवाओं को केवल वाहन चलाना ही नहीं सिखाया जा रहा, बल्कि उन्हें सड़क सुरक्षा, यातायात नियम, रोड साइन, वाहन संचालन और सामान्य तकनीकी जानकारी भी दी जा रही है। प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें ऐसा कौशल देना है, जिससे वे प्रशिक्षण पूरा होते ही रोजगार के योग्य बन सकें।
ड्राइविंग के साथ मिल रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) चलाने का व्यावहारिक अभ्यास कराया जा रहा है। साथ ही वाहन की मूलभूत मरम्मत, सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग, ट्रैफिक नियमों का पालन और आपात स्थिति में सावधानी बरतने जैसे विषयों की भी जानकारी दी जा रही है।
जिला प्रशासन प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी प्रतिभागियों का ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा रहा है, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के सीधे रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें।
युवाओं में बढ़ा आत्मविश्वास
प्रशिक्षण ले रहीं सोड़ी सोमड़ी बताती हैं कि इस पहल ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास पैदा किया है। अब उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने और अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद दिखाई दे रही है।
वहीं प्रशिक्षणार्थी पुनेम ज्योति का कहना है कि ड्राइविंग सीखने के बाद उनके सामने रोजगार के कई नए अवसर खुलेंगे। यह कौशल भविष्य में उनके लिए आजीविका का मजबूत आधार बनेगा और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगा।
मुख्यधारा से जोड़ने की पहल
कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। केवल पुनर्वास ही नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
उन्होंने कहा कि आरसेटी द्वारा संचालित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो युवाओं को नया कौशल और नया आत्मविश्वास दोनों प्रदान कर रहा है।
बदलाव की नई मिसाल बन रहे युवा
आरसेटी की यह पहल साबित कर रही है कि यदि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो कठिन परिस्थितियों से निकलकर भी नई शुरुआत की जा सकती है। आज ये युवा केवल वाहन चलाना नहीं सीख रहे, बल्कि अपने जीवन की दिशा भी बदल रहे हैं।
स्टेयरिंग पर उनकी मजबूत पकड़ इस बात का प्रतीक है कि अब उनका भविष्य हिंसा नहीं, बल्कि मेहनत, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका की राह पर आगे बढ़ रहा है। यह पहल सुकमा सहित पूरे बस्तर क्षेत्र में पुनर्वास और कौशल विकास का सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।



