सीजी भास्कर, 18 अक्टूबर : छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जी तबादला आदेश (Chhattisgarh Fake Transfer Order) जारी होने का मामला सामने आया है। विभागीय लेटरहेड, मंत्रालय की कथित जाली मुहर और अवर सचिव आरपी वर्मा के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर 19 शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले के आदेश जारी किए गए। इनमें सहायक शिक्षक, व्याख्याता, प्रधान पाठक और व्यायाम शिक्षक शामिल बताए गए हैं। कुछ कर्मचारियों के इन आदेशों के आधार पर कार्यभार ग्रहण करने की जानकारी भी सामने आई है।
इस (Chhattisgarh Fake Transfer Order) मामले के सामने आने के बाद विभाग में जांच शुरू कर दी गई है। मामले का खुलासा होने के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने जांच शुरू कर दी है। शासन को आशंका है कि कर्मचारियों ने मिलीभगत या अनुचित माध्यमों से ये आदेश तैयार करवाए होंगे। संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
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तीन दिन में जवाब तलब
विभाग ने 15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। उनसे पूछा गया है कि फर्जी आदेश उनके कार्यालय तक किस माध्यम से पहुंचे, कितने कर्मचारियों ने कार्यमुक्ति या कार्यभार ग्रहण करने के लिए आवेदन दिया और कितने कर्मचारियों को रिलीव या जॉइन कराया गया। इसके अलावा, (Chhattisgarh Fake Transfer Order) की जानकारी मिलने के बाद जिला स्तर पर की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा गया है। विभाग यह पता लगाना चाहता है कि फर्जी आदेशों के आधार पर कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने या नए स्थान पर पदभार ग्रहण कराने की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई।
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इन 15 जिलों से मांगी गई रिपोर्ट
जिन जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है, उनमें रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, बलौदाबाजार, बस्तर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, राजनांदगांव, कांकेर, कबीरधाम, बालोद, धमतरी, सरगुजा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बलरामपुर-रामानुजगंज और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई शामिल हैं।
सभी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि (Chhattisgarh Fake Transfer Order) से जुड़े आदेश किन माध्यमों से जिलों तक पहुंचे और उन पर क्या कार्रवाई की गई।
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बिना सत्यापन जॉइनिंग और रिलीविंग पर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंत्रालय से आदेश का सत्यापन किए बिना जिला स्तर पर कर्मचारियों को कार्यमुक्त या नए स्थान पर जॉइनिंग कैसे दी गई। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आदेशों की पुष्टि के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं और इसमें किन अधिकारियों की भूमिका रही।
यदि सत्यापन की प्रक्रिया में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है। (Chhattisgarh Fake Transfer Order) मामले में आदेशों की प्रामाणिकता और उनके आधार पर की गई कार्रवाई जांच के प्रमुख बिंदु होंगे।
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2020 में भी सामने आया था ऐसा मामला
स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जी तबादला आदेश का मामला पहले भी सामने आ चुका है। 30 मार्च 2020 को तत्कालीन अवर सचिव जनक कुमार के नाम से 21 व्याख्याताओं, शिक्षकों और एक क्लर्क के तबादले का फर्जी आदेश जारी किया गया था। इसमें बस्तर के कई शिक्षक और महिला शिक्षक शामिल थे, जिन्हें बालोद, रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग भेजने का उल्लेख था।
मामला सामने आने के बाद तत्कालीन अवर सचिव ने राखी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। वर्तमान मामले में भी जांच के जरिए फर्जी आदेश तैयार करने और उनके आधार पर कार्रवाई करने वालों की भूमिका का पता लगाया जाएगा। (Chhattisgarh Fake Transfer Order) की घटना ने सरकारी तबादला आदेशों के सत्यापन की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
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सरकारी आदेशों के ऑनलाइन सत्यापन की सलाह
साइबर अपराध विशेषज्ञ मुकेश चौधरी के अनुसार, सरकारी आदेश ई-मेल के माध्यम से भेजने के साथ विभागीय वेबसाइट पर भी अपलोड किए जाने चाहिए। जिला स्तर पर ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आदेशों का सत्यापन करने के बाद ही जॉइनिंग या रिलीविंग दी जानी चाहिए। उन्होंने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल से जुड़ा प्रशिक्षण देने की जरूरत भी बताई। ऑनलाइन सत्यापन की व्यवस्था से फर्जी आदेशों की पहचान करने और उनके आधार पर होने वाली अनधिकृत कार्रवाई को रोकने में मदद मिल सकती है।
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