सीजी भास्कर, 27 सितंबर : बैलाडीला के नंदराज पहाड़ में खनन (Bailadila Mining Protest) को लेकर एक बार फिर विरोध के हालात बन रहे हैं। 50 से अधिक गांवों के ग्रामीण खनन गतिविधियों के विरोध में आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नंदराज पहाड़ उनके लिए धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र है। ग्रामीणों के मुताबिक, पहाड़ पर पेड़ों की कटाई और लौह अयस्क से जुड़ी गतिविधियां शुरू होने की जानकारी के बाद क्षेत्र में नाराजगी बढ़ी है। डिपॉजिट-13 को लेकर पहले भी स्थानीय स्तर पर विरोध हो चुका है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इस परियोजना को लेकर 2019 में विरोध के बाद गतिविधियां रोकने के आदेश भी दिए गए थे।
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7200 पेड़ों की कटाई
अब ग्रामीणों का दावा है कि वन विभाग ने पहले चरण में करीब 7200 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी है। उनका कहना है कि आगे भी बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई हो सकती है। इससे एक बार फिर खनन विरोध (Bailadila Mining Protest) तेज होने की स्थिति बन रही है। 2019 में डिपॉजिट-13 परियोजना के विरोध में स्थानीय आदिवासियों ने आंदोलन किया था। नंदराज पहाड़ को लेकर स्थानीय समुदाय की धार्मिक मान्यता लंबे समय से इस विवाद का प्रमुख मुद्दा रही है।
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नंदराज को मानते हैं देवता
ग्रामीणों के अनुसार नंदराज पहाड़ उनके प्रकृति देवता नंदराज और उनकी पत्नी पितोद देवी से जुड़ा धार्मिक स्थल है। उनका कहना है कि पहाड़ की खुदाई और पेड़ों की कटाई से उनकी धार्मिक आस्था प्रभावित होगी। इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति से जुड़े ग्रामीण आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नंदराज पहाड़ (Bailadila Mining Protest) को बचाने के लिए वे सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराएंगे।
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अयस्क का सैंपल भेजा
नंदराज पहाड़ से निकलने वाले लौह अयस्क की गुणवत्ता की जांच की प्रक्रिया भी चल रही है। शनिवार को करीब 10 टन लंप लौह अयस्क का पहला सैंपल नगरनार स्टील प्लांट भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल व्यावसायिक स्तर पर नियमित खनन शुरू नहीं हुआ है। सैंपल की जांच रिपोर्ट और निर्धारित मानकों की पुष्टि के बाद नियमित खनन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि, एनएमडीसी की रिपोर्ट के अनुसार डिपॉजिट-13 में शुरुआती खनन गतिविधियां 23 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी हैं।
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खनन पर फिर टकराव
डिपॉजिट-13 को लेकर खनन परियोजना और स्थानीय ग्रामीणों की आपत्तियों के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। ग्रामीण धार्मिक आस्था और जंगल-पहाड़ के संरक्षण का मुद्दा उठा रहे हैं, जबकि परियोजना से जुड़ी गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं। बैलाडीला डिपॉजिट-13 में खनन पट्टा 2017 में स्वीकृत हुआ था और बाद में इसे एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड के नाम स्थानांतरित किया गया। परियोजना के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज को 2018 में एमडीओ नियुक्त किए जाने का भी रिकॉर्ड उपलब्ध है। आने वाले दिनों में 50 से अधिक गांवों के ग्रामीणों की प्रस्तावित गतिविधियों पर नजर रहेगी। बैलाडीला खनन विरोध (Bailadila Mining Protest) के बीच प्रशासन और परियोजना से जुड़े पक्षों के सामने ग्रामीणों की आपत्तियों को लेकर स्थिति संभालने की चुनौती होगी।
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