सीजी भास्कर, 27 सितंबर : पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में हाई कोर्ट ने डॉक्टर पति को दोषी (Doctor Husband Suicide Case) ठहराया है। कोर्ट ने मामले में सामने आए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को एक साथ देखते हुए माना कि पति के व्यवहार से पत्नी ऐसी स्थिति में पहुंची, जहां आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
अब दोषी की सजा की अवधि तय की जानी है। इसके लिए आरोपी डॉक्टर और उसके अधिवक्ता को 26 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के समग्र मूल्यांकन पर जोर दिया गया है।
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निचली अदालत की सजा
मामला बिलासपुर की रहने वाली रश्मि प्रकाश की आत्महत्या (Doctor Husband Suicide Case) से जुड़ा है। रश्मि ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। उनके भाई आशीष नाथ की शिकायत के आधार पर पति डॉ. संजय प्रकाश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। निचली अदालत ने 28 जून 2016 को भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के तहत डॉक्टर पति को तीन साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 306 के आरोप से उन्हें बरी कर दिया गया था।
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हाई कोर्ट में चुनौती
निचली अदालत के फैसले को मृतका के भाई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दूसरी ओर, डॉक्टर पति ने भी 498-ए के तहत मिली सजा के खिलाफ अपील दायर की थी हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मृतका के बेटे रोहित, बेटी तनिष्का और अन्य परिजनों के बयान सामने आए। बच्चों ने पिता पर क्लीनिक में काम करने वाली एक नर्स से संबंध होने और मां के विरोध करने पर उनके साथ मारपीट किए जाने के आरोप लगाए।
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बच्चों ने लगाए गंभीर आरोप
बच्चों के बयानों के अनुसार, एक बार उनकी मां को पानी में नींद की गोलियां मिलाकर दी गई थीं, जिससे उनकी तबीयत गंभीर हो गई थी। घटना से एक दिन पहले भी मारपीट करने और तलाक देकर नर्स से शादी करने की धमकी देने का आरोप लगाया गया। हाई कोर्ट ने इन बयानों और मामले में मौजूद अन्य साक्ष्यों को साथ रखकर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला (Doctor Husband Suicide Case) पर विचार किया। कोर्ट ने माना कि पूरे घटनाक्रम का सामूहिक आकलन करने पर पत्नी को आत्मघाती कदम के लिए मजबूर करने वाली परिस्थितियां सामने आती हैं।
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सबूतों को साथ देखा
हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने गवाहों के बयानों और साक्ष्यों का अलग-अलग आकलन किया था। जबकि सभी तथ्यों को एक साथ देखने पर पति के व्यवहार और पत्नी की आत्महत्या के बीच परिस्थितिजन्य संबंध सामने आता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लगातार ऐसा वातावरण बनाना, जिसमें किसी व्यक्ति को आत्मघाती कदम के अलावा कोई रास्ता नजर न आए, परिस्थितियों के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने के दायरे में आ सकता है।
26 अक्टूबर को सजा
हाईकोर्ट ने डॉक्टर पति को दोषी ठहराया (Doctor Husband Suicide Case) है। अब अदालत आरोपी को किस अवधि की सजा देगी, इस पर 26 अक्टूबर को सुनवाई होगी। आरोपी और उसके अधिवक्ता को निर्धारित तारीख पर अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। इस सुनवाई के बाद मामले में सजा की अवधि तय की जाएगी।



