सीजी भास्कर, 26 सितंबर : भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के मामले में नया मोड़ आया है। मामले में गिरफ्तार रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग को कोर्ट से जमानत मिल गई है। स्क्रैप चोरी मामला (BSP Scrap Theft Case) अब तक 21 गिरफ्तारियों तक पहुंच चुका है। पुलिस ने विनोद कुमार गर्ग को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि BSP से चोरी किए गए स्क्रैप को रसमड़ा स्थित कंपनी परिसर में लाकर खपाया जाता था। पुलिस की जांच में स्क्रैप की खरीद-फरोख्त, परिवहन और कंपनी तक पहुंचने से जुड़े साक्ष्यों की बात सामने आई है।
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21 आरोपियों की गिरफ्तारी
स्क्रैप चोरी मामले (BSP Scrap Theft Case) में इससे पहले BSP के GM-AGM समेत 19 लोगों की गिरफ्तारी की गई थी। विनोद कुमार गर्ग और कंपनी के डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 21 हो गई। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया था और पुलिस जांच आगे जारी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी का स्क्रैप किन लोगों के जरिए प्लांट से बाहर निकाला गया और उसे खरीदने तथा कंपनी परिसर तक पहुंचाने में किस-किस की भूमिका रही।
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गोदाम में डंप होता था
पुलिस के अनुसार, आरोपी ट्रांसपोर्टर संजय सिंह BSP से चोरी किए गए लौह स्क्रैप को ग्राम अकलोरडीह स्थित एके ट्रेडर्स के गोदाम में डंप करता था। इसके बाद स्क्रैप को रसमड़ा स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड की इकाई तक पहुंचाए जाने का आरोप है। जांच में पुलिस को स्क्रैप की खरीद-बिक्री और उसके कंपनी परिसर तक पहुंचने से जुड़े साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, चोरी के स्क्रैप से लदी गाड़ी के कंपनी परिसर में पहुंचने से लेकर सामग्री अनलोड किए जाने तक का वीडियो भी जांच में सामने आया है।
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26 मई को खुला मामला
स्क्रैप चोरी मामले (BSP Scrap Theft Case) की जांच की शुरुआत 26 मई 2026 को हुई थी। पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स के गोदाम और हथखोज के प्लॉट नंबर-18 पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान कई हाईवा, ट्रक और अन्य वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री मिली थी। पुलिस ने करीब 250 टन लौह स्क्रैप जब्त किया था।
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3.22 करोड़ की जब्ती
पुलिस ने स्क्रैप की ढुलाई और लोडिंग में इस्तेमाल कई वाहन, जेसीबी, हाइड्रा और अन्य मशीनें भी जब्त की थीं। जब्त स्क्रैप, वाहनों और मशीनरी की कुल कीमत करीब 3 करोड़ 22 लाख रुपये आंकी गई थी। इसमें करीब 90 लाख रुपये का लौह स्क्रैप शामिल बताया गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस ने स्क्रैप के स्रोत, परिवहन और खरीदारों से जुड़े लोगों की भूमिका खंगालनी शुरू की।
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फ्लाई ऐश की आड़ में खेल
फ्लाई ऐश की आड़ में चोरी (BSP Scrap Theft Case) किए जाने की बात भी जांच में सामने आने का दावा किया गया था। पुलिस के अनुसार, लौह सामग्री को फ्लाई ऐश के साथ छिपाकर प्लांट से बाहर निकालने की आशंका की जांच की गई। BSP परिसर में CISF की सुरक्षा और CCTV निगरानी के बावजूद स्क्रैप बाहर निकलने के कारण पुलिस ने संभावित अंदरूनी मिलीभगत के एंगल से भी जांच की।
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जांच अभी जारी
जांच का दायरा (BSP Scrap Theft Case) अब चोरी के स्क्रैप की खरीद-फरोख्त और उसे संबंधित कंपनी तक पहुंचाने वाले नेटवर्क तक बढ़ गया है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और प्रत्येक आरोपी की भूमिका के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विनोद कुमार गर्ग को जमानत मिलने के बावजूद मामले की जांच जारी है। जमानत को मामले में आरोपों से बरी होना नहीं माना जाता; अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगी।
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