सीजी भास्कर, 18 अक्टूबर : बिलासपुर जिले में महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में दोषी ठहराए गए शिक्षक विवेक गुप्ता के खिलाफ 24 दिन बाद भी विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है। तखतपुर न्यायालय ने 26 सितंबर 2026 को दो धाराओं में दोषी ठहराते हुए शिक्षक को सजा सुनाई थी। इसके बावजूद वह बेलमुंडी स्कूल में नौकरी कर रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय का कहना है कि उन्हें शिक्षक को सजा मिलने की जानकारी नहीं है। न्यायालय का आदेश विभाग तक नहीं पहुंचने के संबंध में जानकारी लेकर प्राथमिकता से कार्रवाई की जाएगी। सजा के बाद भी शिक्षक के नौकरी करने (Teacher Conviction Departmental Action) के मामले में अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर नजर है।
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दो धाराओं में दोषी, कारावास और जुर्माने की सजा
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऋचा यादव की अदालत ने अर्चना विहार, नेहरू नगर निवासी शिक्षक विवेक गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत एक साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, धारा 323 के तहत एक हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर प्रत्येक धारा में एक-एक महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
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2018 में शासकीय स्कूल में हुई थी घटना
अभियोजन के अनुसार, घटना 17 फरवरी 2018 को सुबह करीब 11:30 से दोपहर 12 बजे के बीच शासकीय प्राथमिक शाला चनाडोंगरी में हुई थी। वहां पदस्थ महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया था कि शिक्षक ने उनका हाथ पकड़कर खींचा, सीने पर हाथ लगाया और उनके चरित्र पर लांछन लगाते हुए गाली-गलौज की। विरोध करने पर मारपीट कर उन्हें दीवार की ओर धकेल दिया, जिससे उनके चेहरे और सिर में चोटें आईं।
आरोपी पर तेजाब फेंकने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे। मामले में न्यायालय ने पीड़िता की गवाही, अन्य गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्यों पर विचार करने के बाद छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप प्रमाणित पाए। महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले (Teacher Conviction Departmental Action) में अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
तीन अन्य आरोपों में मिला संदेह का लाभ
न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर पीछा करने, अश्लील गाली-गलौज और आपराधिक धमकी के आरोपों में संदेह का लाभ देते हुए शिक्षक को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने 7 अगस्त से 9 अक्टूबर 2018 तक न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश भी दिया।
दोषसिद्धि के बाद विभाग की जिम्मेदारी
अधिवक्ता अनुराग वाजपेयी के अनुसार, शासकीय कर्मचारी को आपराधिक मामले में सजा मिलने पर संबंधित सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 19 के तहत दोषसिद्धि के आधार पर विभाग निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दंड देने पर विचार कर सकता है।
ऐसे मामलों में विस्तृत विभागीय जांच के बिना भी कार्रवाई संभव है, लेकिन इसके लिए नियमों और मामले की परिस्थितियों का पालन जरूरी है। आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बाद विभागीय कार्रवाई (Teacher Conviction Departmental Action) के लिए संबंधित आदेश और सेवा नियम महत्वपूर्ण होंगे।
यदि शिक्षक ने अपनी दोषसिद्धि की जानकारी जानबूझकर विभाग से छिपाई है, तो इस पहलू की भी जांच की जा सकती है। हालांकि, केवल जानकारी नहीं देने के आधार पर धोखाधड़ी या आपराधिक न्यासभंग का मामला स्वतः नहीं बनता। इसके लिए संबंधित अपराध के आवश्यक तत्वों और साक्ष्यों की पुष्टि जरूरी होगी। इसी तरह, पहले से प्राप्त वेतन की वसूली भी केवल दोषसिद्धि के आधार पर स्वतः नहीं की जा सकती।
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आदेश की जानकारी लेकर करेंगे कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय ने कहा कि उन्हें शिक्षक को सजा मिलने की जानकारी नहीं है। न्यायालय का आदेश विभाग तक नहीं पहुंचने के संबंध में जानकारी ली जाएगी। उन्होंने मामले को संज्ञान में लेकर प्राथमिकता से कार्रवाई करने की बात कही है।
सजा सुनाए जाने के 24 दिन बाद भी शिक्षक के स्कूल में कार्यरत रहने से विभागीय सूचना व्यवस्था और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। अब न्यायालय के आदेश की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग दोषी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई (Teacher Conviction Departmental Action) के तहत क्या कदम उठाता है, यह देखना होगा।
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