सीजी भास्कर, रायपुर, 22 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग ( Chhattisgarh Education Department Cases ) इन दिनों 14 हजार से ज्यादा अदालती मामलों से जूझ रहा है। पुरानी पेंशन, क्रमोन्नति, प्रमोशन और जीपीएफ से रकम निकासी जैसे मुद्दों पर शिक्षक कोर्ट पहुंच रहे हैं। कई मामलों में कर्मचारियों की पेंशन और पदोन्नति अटकी हुई है, तो कुछ में लाखों रुपये की कथित गड़बड़ी को लेकर विवाद चल रहा है। मुकदमों का बोझ बढ़ने के कारण विभाग को अदालतों में जवाब पेश करने और प्रकरणों की निगरानी के लिए दो अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी पड़ी है।
यह भी पढ़ें : Bastar Dussehra : बस्तर दशहरे में बड़ा हादसा, विजय रथ के पहिए के नीचे दबकर ग्रामीण की मौत
14 हजार से ज्यादा याचिकाएं
पिछले दिनों कांकेर में जीपीएफ खाते से 90 लाख रुपये की कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग से जुड़े अदालती प्रकरणों की पड़ताल की गई। इसमें प्रदेशभर में अलग-अलग मुद्दों पर कुल 14,324 याचिकाओं का अनुमानित आंकड़ा सामने आया है। इनमें कुछ मामलों का निराकरण हो चुका है, जबकि कई अब भी लंबित हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा विवाद पुरानी पेंशन और क्रमोन्नति को लेकर हैं। इसके अलावा प्रमोशन, जीपीएफ, ट्रांसफर और स्वामी आत्मानंद स्कूलों में पढ़ाई के माध्यम से जुड़े मामले भी अदालत तक पहुंचे हैं।
यह भी पढ़ें : Raigarh Trailer Driver Robbery Case : रायगढ़ में चाकू दिखाकर ट्रेलर चालक से लूट, मुख्य आरोपी समेत 6 गिरफ्तार
किस मुद्दे पर कितने मामले
शिक्षा विभाग से जुड़े अदालती प्रकरणों का अनुमानित ब्योरा इस प्रकार है:
- पुरानी पेंशन: करीब 6,000 मामले
- क्रमोन्नति: करीब 5,000 मामले
- प्रमोशन: करीब 1,000 मामले
- जीपीएफ विवाद, ट्रांसफर व अन्य: करीब 1,500 मामले
- स्वामी आत्मानंद स्कूलों में माध्यम का विवाद: करीब 800 मामले
- कुल: 14,324 मामले
ये आंकड़े अनुमानित हैं। पुरानी पेंशन से जुड़े कुछ प्रकरणों और आत्मानंद स्कूलों में माध्यम के विवाद वाली याचिकाओं का निराकरण हो चुका है।
यह भी पढ़ें : Sonia Gandhi Autobiography : सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर किया डेब्यू, आत्मकथा ‘बिलॉन्ग: ए जर्नी ऑफ लव’ की पहली झलक की साझा
पुरानी पेंशन पर सबसे बड़ा विवाद
पुरानी पेंशन ( Chhattisgarh Education Department Cases ) के मामलों में शिक्षकों और शासन के बीच मुख्य विवाद सेवा अवधि की गणना को लेकर है। शिक्षक वर्ष 1998 से शिक्षाकर्मी के रूप में की गई सेवा को पेंशन के लिए मान्य करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, शासन 2018 में संविलियन के बाद की सेवा को आधार मान रहा है। जानकारी के अनुसार, पुरानी पेंशन के लिए न्यूनतम 10 साल की सेवा जरूरी है। ऐसे में संविलियन के बाद 10 साल पूरे होने से पहले सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों के सामने पेंशन पाने का संकट खड़ा हो सकता है। सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कई शिक्षक अपनी पुरानी सेवा की गणना कराने के लिए अदालत पहुंचे हैं।
यह भी पढ़ें : Arshdeep Singh T20 Wickets Record : अर्शदीप सिंह इतिहास रचने से सिर्फ 5 विकेट दूर, T20 इंटरनेशनल में बना सकते हैं बड़ा रिकॉर्ड
प्रमोशन और क्रमोन्नति पर विवाद
क्रमोन्नति और प्रमोशन ( Chhattisgarh Education Department Cases ) से जुड़े हजारों मामले लंबित होने का अनुमान है। क्रमोन्नति के करीब 5 हजार और प्रमोशन के लगभग एक हजार प्रकरण बताए गए हैं। इन मामलों में शिक्षकों की सेवा संबंधी मांगों और विभागीय निर्णयों को लेकर विवाद अदालत तक पहुंचे हैं। मामलों की बड़ी संख्या के कारण विभाग के सामने पुराने प्रकरणों की समीक्षा करने और लंबित याचिकाओं के निपटारे में आ रही बाधाओं को दूर करने की चुनौती है।
यह भी पढ़ें : Sirpur UNESCO World Heritage : छत्तीसगढ़ के सिरपुर को मिली वैश्विक पहचान, UNESCO की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल
जीपीएफ निकासी पर भी सवाल
जीपीएफ ( Chhattisgarh Education Department Cases ) से रकम निकासी को लेकर भी गंभीर विवाद सामने आए हैं। कुछ मामलों में 40 लाख से लेकर 90 लाख रुपये तक की कथित निकासी का उल्लेख है। संबंधित शिक्षकों का दावा है कि उन्होंने अपने खातों से ये रकम निकाली ही नहीं, इसके बावजूद उनसे राशि की रिकवरी की जा रही है। हालांकि, इन मामलों में वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित जांच तथा अदालती कार्यवाही के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
यह भी पढ़ें : Chhattisgarh Dussehra Festival : छत्तीसगढ़ के इस गांव में 24 अक्टूबर को मनेगा दशहरा! रामलीला के बाद होगा रावण वध
हिंदी और अंग्रेजी माध्यम विवाद
सरगुजा और बस्तर के करीब 24 स्कूलों में हिंदी माध्यम बंद कर अंग्रेजी माध्यम शुरू करने के फैसले को प्राचार्यों ने अदालत में चुनौती दी थी। इनमें अंबिकापुर, मैनपाट, सीतापुर, बतौली और जामनगर सहित आसपास के स्कूल शामिल थे।
प्राचार्यों का तर्क था कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पहले से ही स्कूलों की कमी है। हिंदी माध्यम बंद होने से 600 से 800 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका थी। साथ ही, इन विद्यार्थियों के प्रवेश के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी स्पष्ट नहीं थी। अदालत के हस्तक्षेप के बाद संबंधित स्कूलों में हिंदी के साथ अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं भी संचालित हो रही हैं। इन याचिकाओं का निराकरण हो चुका है।
यह भी पढ़ें : Tiger Shroff House Firing Case : टाइगर श्रॉफ से पहले अमिताभ, सलमान, आमिर और अक्षय थे निशाने पर! सुरक्षा देख बदली हमले की साजिश
पुराने मामलों की समीक्षा जारी
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह के अनुसार, अदालतों में लंबित मामलों के जल्द निराकरण पर ध्यान दिया जा रहा है। लीगल टीम पुराने प्रकरणों की समीक्षा कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि कौन से मामले किन कारणों से लंबित हैं। विभाग का प्रयास है कि इनका जल्द से जल्द निराकरण कराया जाए। प्रदेशभर में हजारों याचिकाएं लंबित होने से शिक्षकों की पेंशन, क्रमोन्नति और पदोन्नति जैसे विषयों पर फैसले का इंतजार बढ़ रहा है। अब विभाग की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया से इन मामलों के निपटारे में कितनी तेजी आती है, इस पर नजर रहेगी।
यह भी पढ़ें : Women Reservation in Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी 45 सीटें? जानें 90 से 135 सीटों का पूरा गणित



