सीजी भास्कर, 22 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ की प्राचीन नगरी सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। यह प्रदेश की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। (Sirpur UNESCO World Heritage)
करीब डेढ़ हजार साल पुराने मंदिरों, बौद्ध विहारों, दुर्लभ मूर्तियों और प्राचीन स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध सिरपुर कभी दक्षिण कोसल की राजधानी था। यहां शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन धर्म की परंपराएं एक साथ विकसित हुईं, जो इसे खास बनाती हैं।
दक्षिण कोसल की राजधानी था सिरपुर : Sirpur UNESCO World Heritage
प्राचीन समय में सिरपुर को श्रीपुर के नाम से जाना जाता था। पांडुवंशी शासकों के शासनकाल में यह राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा। सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी इस क्षेत्र की यात्रा की थी। उनके यात्रा विवरण में यहां की बौद्ध परंपरा का उल्लेख मिलता है।
लक्ष्मण मंदिर और बौद्ध विहार हैं प्रमुख आकर्षण
सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर प्राचीन भारतीय ईंटों से बने मंदिरों का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका निर्माण करीब 650 ईस्वी में हुआ माना जाता है। मंदिर का निर्माण रानी वासटा ने अपने पति हर्षगुप्त की स्मृति में कराया था।
यहां आनंदप्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार, तीवरदेव महाविहार और सुरंग टीला जैसे ऐतिहासिक स्थल भी हैं। महानदी के तट पर स्थित गंधेश्वर महादेव मंदिर भी सिरपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है।
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खुदाई में मिले दो हजार से ज्यादा पुरावशेष : Sirpur UNESCO World Heritage
सिरपुर में पुरातात्विक खुदाई के दौरान दो हजार से अधिक पुरावशेष मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें धातु की मूर्तियां, आभूषण बनाने के उपकरण, लोहे के बर्तन, ताले, दीपक, मिट्टी के घड़े, कांच की चूड़ियां, खिलौने और प्राचीन सिक्के शामिल हैं। ये अवशेष उस समय के लोगों के रहन-सहन, कला, व्यापार और धार्मिक जीवन की झलक दिखाते हैं।
विश्व धरोहर का दर्जा मिलने की दिशा में अहम कदम
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने 1 जनवरी 2026 को सिरपुर के ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों का निरीक्षण किया था। सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया जाना इसके संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, अस्थायी सूची में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि सिरपुर (Sirpur UNESCO World Heritage) को विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिल गया है। इसके लिए आगे नामांकन और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस पहल से सिरपुर में पर्यटन, शोध और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
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