सीजी भास्कर, 3 नवंबर। छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता (Pharmacy Council) जा रहा है। प्रदेश के फार्मासिस्टों की समस्याएं और लाइसेंस संबंधी विवाद लंबित होने के बीच आगामी 5 नवंबर के कार्यक्रम पर लाखों रुपये खर्च करने की तैयारी को लेकर अध्यक्ष और रजिस्ट्रार की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।


15 लाख के अनुदान के बाद 10 लाख की अतिरिक्त स्वीकृति Pharmacy Council
जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम के लिए फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली से 15 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके बावजूद करीब 10 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि वित्तीय निर्णय आमसभा की बैठक में लिए जाने चाहिए, लेकिन बैठक आयोजित किए बिना ही अतिरिक्त राशि स्वीकृत करने का निर्णय ले लिया गया। रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में कम खर्च पर आयोजन संभव होने के बावजूद इतनी बड़ी राशि खर्च करने की जरूरत पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
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अभिषेक चंद्रा प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग
फार्मासिस्ट अभिषेक चंद्रा के लाइसेंस संबंधी प्रकरण ने भी काउंसिल की कार्यप्रणाली पर सवाल (Pharmacy Council) खड़े किए हैं। अभिषेक चंद्रा ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि अध्यक्ष अरुण मिश्रा और रजिस्ट्रार अश्वनी गुरुद्वेकर के माध्यम से उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
वहीं, आमसभा में बहुमत से लिए गए निर्णय और अध्यक्ष की मंजूरी के बावजूद बैठक के मिनट्स जारी नहीं होने का आरोप भी सामने आया है। पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
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शासन से वित्तीय प्रक्रिया की जांच कराने की मांग
फार्मासिस्टों का सवाल है कि जब लाइसेंस विवाद, समस्याएं और पारदर्शिता जैसे अहम मुद्दे लंबित हैं, तो कार्यक्रमों पर लाखों रुपये खर्च करना प्राथमिकता क्यों बन रहा है।
शासन से 15 लाख रुपये के अनुदान, अतिरिक्त 10 लाख की स्वीकृति, आमसभा की अनुमति और वित्तीय प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही अभिषेक चंद्रा के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग उठाई गई है।
फार्मेसी काउंसिल फार्मासिस्टों के हितों की रक्षा करने वाली संस्था है। ऐसे में उसके धन और अधिकारों का उपयोग पारदर्शी तरीके से फार्मासिस्टों के हित में होना चाहिए।
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