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Home » 36 युद्धपोत, 7 डेस्ट्रॉयर, फ्रिगेट-पनडुब्बियां… ऑपरेशन सिंदूर की रात कराची में तबाही के मूड में थी इंडियन नेवी

36 युद्धपोत, 7 डेस्ट्रॉयर, फ्रिगेट-पनडुब्बियां… ऑपरेशन सिंदूर की रात कराची में तबाही के मूड में थी इंडियन नेवी

By Newsdesk Admin
14/05/2025
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सीजी भास्कर, 14 मई। भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में सैन्य शक्ति प्रदर्शन को केंद्र में ला दिया है।

Contents
  • 1. INS विक्रांत और कैरियर बैटल ग्रुप
  • कैरियर बैटल ग्रुप:
  • रणनीतिक प्रभाव:
  • 2. सात विध्वंसक:
  • 3. सात स्टील्थ फ्रिगेट :
  • 4. पनडुब्बियां :
  • रणनीतिक महत्व :
  • 5. तेज हमलावर नौकाएं और मिसाइल बोट :

ऑपरेशन सिंदूर, जिसे मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया, भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ।

इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने कराची के निकट अरब सागर में 36 युद्धपोतों की तैनाती की। जिसमें स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत, 7 विध्वंसक, 7 फ्रिगेट, पनडुब्बियां और तेज हमलावर नौकाएं शामिल थीं. यह तैनाती भारत की समुद्री ताकत का शानदार प्रदर्शन थी। जिसने पाकिस्तान को रक्षात्मक स्थिति में धकेल दिया.ऑपरेशन सिंदूरमई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले ने भारत को निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रेरित किया। इस हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों से जोड़ा गया।

जिसके बाद भारत ने त्रि-आयामी दबाव (सेना, वायुसेना और नौसेना) के जरिए जवाबी कार्रवाई शुरू की.ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकी ठिकानों को नष्ट करना। पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देना था कि भारत किसी भी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है। इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने कराची के निकट अरब सागर में अभूतपूर्व तैनाती की। इस तैनाती ने पाकिस्तान नौसेना को पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया।

भारतीय नौसेना की तैनाती: एक ऐतिहासिक प्रदर्शन1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट और ऑपरेशन पायथन के दौरान कराची बंदरगाह पर हमला करने के लिए केवल 6 युद्धपोतों का उपयोग किया था। उस हमले ने पाकिस्तान की समुद्री रसद को तबाह कर दिया था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में, भारतीय नौसेना ने 36 युद्धपोतों की तैनाती की जो 1971 की तुलना में छह गुना अधिक है।

1. INS विक्रांत और कैरियर बैटल ग्रुप

INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत, इस तैनाती का केंद्रबिंदु था। 40,000 टन का यह युद्धपोत मिग-29K लड़ाकू विमान, कामोव हेलीकॉप्टर और उन्नत हवाई चेतावनी प्रणालियों से लैस है।

कैरियर बैटल ग्रुप:

विक्रांत के साथ 8-10 युद्धपोतों का एक समूह तैनात किया गया, जिसमें विध्वंसक, फ्रिगेट और सहायक जहाज शामिल थे। इस समूह ने अरब सागर में कराची के निकट एक अभेद्य समुद्री दीवार बनाई। जिसने पाकिस्तानी नौसेना और वायुसेना को तट पर ही सीमित कर दिया।

रणनीतिक प्रभाव:

मिग-29K विमानों ने हवाई निगरानी और हमले की क्षमता प्रदान की, जबकि हेलीकॉप्टरों ने पनडुब्बी-विरोधी युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2. सात विध्वंसक:

बहुआयामी ताकतभारतीय नौसेना ने सात विध्वंसक तैनात किए, जो ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (MRSAM) और वरुणास्त्र भारी टॉरपीडो से लैस थे।

ये विध्वंसक समुद्री सतह, हवा और पनडुब्बी-विरोधी लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम थे। ब्रह्मोस मिसाइल, जो 450 किमी की रेंज और 2.8 मैक की गति से हमला कर सकती है। कराची बंदरगाह और अन्य रणनीतिक लक्ष्यों को तुरंत नष्ट करने की क्षमता रखती थी।

3. सात स्टील्थ फ्रिगेट :

चपलता और शक्तिसात स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट, जिनमें हाल ही में शामिल INS तुशिल भी तैनात की गईं। ये फ्रिगेट उन्नत रडार, मिसाइल प्रणालियों और स्टील्थ तकनीक से लैस थीं, जो हवाई और समुद्री खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकती थीं। इन फ्रिगेट्स ने पश्चिमी तट के साथ एक रक्षात्मक और आक्रामक समुद्री दीवार बनाई, जिसने पाकिस्तानी नौसेना को कोई जवाबी कार्रवाई करने से रोक दिया।

4. पनडुब्बियां :

अदृश्य खतराअनुमानित छह पनडुब्बियां, जिनमें परमाणु-संचालित INS अरिहंत और पारंपरिक स्कॉर्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियां (जैसे INS कलवारी शामिल थीं) ने अरब सागर में गुप्त रूप से संचालन किया.ये पनडुब्बियां स्टील्थ ऑपरेशन्स में माहिर थीं। पाकिस्तानी नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ संभावित हमलों के लिए तैयार थीं।

रणनीतिक महत्व :

INS अरिहंत की परमाणु मिसाइल क्षमता ने भारत की दूसरी हमले की क्षमता (second-strike capability) को मजबूत किया, जो परमाणु निरोध में महत्वपूर्ण है।

5. तेज हमलावर नौकाएं और मिसाइल बोट :

कई तेज हमलावर नौकाएं और मिसाइल बोट भी तैनात की गईं, जो त्वरित और सटीक हमलों के लिए डिज़ाइन की गई थीं। ये छोटे लेकिन घातक जहाज कराची बंदरगाह जैसे लक्ष्यों पर तुरंत हमला करने में सक्षम थे। इनकी तैनाती ने भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ाया, जिससे कुल युद्धपोतों की संख्या 36 तक पहुंच गई।

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