सीजी भास्कर, 15 सितंबर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले (ED Chargesheet) से जुड़ी जांच में सोमवार को बड़ा मोड़ आया। प्रवर्तन एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ करीब 7000 पन्नों का विस्तृत चालान अदालत में पेश किया। अधिकारियों ने दस्तावेज़ों के चार बड़े बंडल कोर्ट में जमा किए। इसी बीच, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने चैतन्य की रिमांड के लिए भी अर्जी दी है।
अदालत ने फिलहाल रिमांड पर फैसला सुरक्षित रखा है और मंगलवार को फिर सुनवाई होगी। चैतन्य की न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद उन्हें जेल से कोर्ट लाया गया था।
ED की जांच में 16.70 करोड़ की अवैध कमाई का दावा
जांच एजेंसी का आरोप है कि शराब कारोबार से जुड़ी हेराफेरी के जरिए चैतन्य बघेल (ED Chargesheet) तक 16.70 करोड़ रुपये की रकम पहुंची। यह रकम कथित तौर पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और फर्जी निवेश योजनाओं में लगाई गई।
जांच दस्तावेज़ बताते हैं कि बघेल डेवलपर्स के “विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट” में लगभग 13 से 15 करोड़ रुपये लगाए गए। लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल 7.14 करोड़ रुपये दिखाए गए। छापेमारी के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपये नकद दिए गए थे, जो कंपनी के कागजों में कहीं दर्ज नहीं है।
फर्जी फ्लैट खरीदी और लेयरिंग का खेल
एजेंसी का आरोप है कि धन को वैध दिखाने के लिए त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने एक ही दिन में 19 फ्लैट खरीदने का सौदा किया। कर्मचारियों के नाम से रजिस्ट्री कराई गई, लेकिन रकम खुद ढिल्लो ने अदा की। यह पूरी प्रक्रिया 19 अक्टूबर 2020 को पूरी हुई।
इसी तरह, भिलाई के एक ज्वेलर्स से पांच करोड़ रुपये नकद लेने का मामला भी सामने आया है। बाद में उसी ज्वेलर्स ने बघेल की कंपनी से छह प्लॉट खरीदे, जिनकी कीमत बाजार (ED Chargesheet) में 80 लाख बताई गई। एजेंसी का दावा है कि यह कैश पहले से शराब कारोबार से आया हुआ था, जिसे बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई।
फ्रंट कंपनियों का इस्तेमाल
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि लेन-देन को छुपाने के लिए अलग-अलग कंपनियों और व्यक्तियों का इस्तेमाल किया गया। पैसा पहले ढिल्लो सिटी मॉल और ढिल्लो ड्रिंक्स जैसी संस्थाओं में घुमाया गया और फिर अंततः बघेल डेवलपर्स तक पहुंचाया गया।
बचाव पक्ष की दलील
चैतन्य बघेल की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल को केवल गवाहों के बयानों के आधार पर फंसाया जा रहा है। उनका तर्क है कि अब तक जांच एजेंसियों ने न तो उन्हें समय पर नोटिस दिया और न ही बयान दर्ज किया। वकील का कहना है कि गिरफ्तारी सिर्फ राजनीतिक दबाव का नतीजा है और चैतन्य का एकमात्र “अपराध” यह है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं।
मामला आगे कहाँ जाएगा?
अब सबकी निगाहें मंगलवार की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि चैतन्य बघेल को EOW-ACB की रिमांड पर भेजा जाएगा या नहीं। एजेंसी ने साफ किया है कि उनके पास डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज़ और गवाहों के बयान जैसे ठोस सबूत मौजूद हैं।





