सीजी भास्कर, 12 नवंबर। प्रदेश में नर्सिंग की पढ़ाई (BSc Nursing CG) करने का सपना देख रहे हजारों विद्यार्थियों के लिए यह साल निराशाजनक रहा है। बीएससी नर्सिंग कॉलेजों की कुल 7,751 सीटों में से 4,427 सीटें अब भी खाली हैं। यह स्थिति तब है जब इस वर्ष 15 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने प्री-नर्सिंग टेस्ट (PNT) पास किया था। जानकारी के अनुसार, सीटें खाली रहने का सबसे बड़ा कारण ऑनलाइन पंजीयन की सीमित सूचना और विभाग की लापरवाही रही। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नर्सिंग प्रवेश के लिए पंजीयन की तारीख 9 से 14 अक्टूबर तय की थी, लेकिन इसकी जानकारी केवल विभागीय वेबसाइट (cgdme.in) पर जारी की गई।
(BSc Nursing CG) न छात्रों को एसएमएस मिला
छात्रों का कहना है कि विभाग ने पंजीयन को लेकर न तो एसएमएस अलर्ट जारी किया, न ही अखबारों में कोई विज्ञापन प्रकाशित किया। दशहरा और दीपावली की छुट्टियों के बीच यह सूचना दब गई, जिसके चलते हजारों छात्रों को यह पता ही नहीं चला कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। नतीजा 15,122 पात्र विद्यार्थियों में से सिर्फ 5,908 ने ही पंजीयन कराया।
(BSc Nursing CG) 4,427 सीटें अब भी खाली
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सभी सरकारी और निजी नर्सिंग कॉलेजों की 7,751 सीटों में से 4,427 सीटें खाली रह गई हैं। इस वजह से आधी से ज्यादा सीटें खाली पड़ी हैं जबकि हजारों विद्यार्थी प्रवेश से वंचित हो गए हैं। कई विद्यार्थियों का आरोप है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी जानबूझकर यह गड़बड़ी कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि कुछ निजी कॉलेजों को लाभ पहुंचाने के लिए सूचना सीमित रखी गई, ताकि रजिस्ट्रेशन कम हो और बाद में सीटें मैनेजमेंट कोटा या ऑफलाइन प्रक्रिया से भरी जा सकें।
सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाई मांग
सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र किशोर गुप्ता ने इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को दोबारा पंजीयन का अवसर दिया जाए, ताकि किसी छात्र का शैक्षणिक वर्ष व्यर्थ न जाए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2023 में भी पंजीयन की तारीख बढ़ाई गई थी, जिससे हजारों विद्यार्थियों को प्रवेश का मौका मिला था।
विभाग पर सवाल
चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सरकार अब रिक्त सीटों को भरने के लिए वैकल्पिक उपायों पर विचार कर रही है। छात्र संगठनों ने सरकार से अपील की है कि पंजीयन प्रक्रिया दोबारा खोली जाए। उनका कहना है कि यदि रजिस्ट्रेशन का मौका फिर से दिया गया, तो अधिकांश सीटें भरी जा सकती हैं और छात्रों का शैक्षणिक सत्र बचाया जा सकेगा।



