सीजी भास्कर, 8 दिसंबर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump Working Visa Rules) की सरकार ने वीजा नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए आदेश के मुताबिक, अब ऐसे लोगों को अमेरिका में एंट्री मिलने में मुश्किल होगी जो फैक्ट-चेकिंग, कंटेंट मॉडरेशन, ऑनलाइन सेफ्टी, ट्रस्ट एंड सेफ्टी या कंप्लायंस जैसे कामों से जुड़े हैं।
यह जानकारी एक सरकारी मेमो के आधार पर दी गई है। इसे सबसे पहले रॉयटर्स की तरफ से शेयर किया गया था। ऐसा माना जा रहा है कि इस नीति का सबसे बड़ा असर तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनमें भारतीयों की संख्या बहुत ही ज्यादा है।
डिजिटल बैकग्राउंड चेकिंग है जरूरी
नए नियमों (Trump Working Visa Rules) के तहत वीजा अधिकारी अब सिर्फ कागजों पर भरोसा नहीं किया करेंगे। वे आवेदक की नौकरी, जिम्मेदारी, उनका लिंक्डइन प्रोफाइल कैसा है और सोशल मीडिया पर वे किस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं। इन सबकी ऑनलाइन जांच की जाएगी। अगर अधिकारियों को लगता है कि व्यक्ति ऐसा काम करता है जिसे ट्रंप प्रशासन अमेरिकियों की अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा मानता है, तो उसका वीजा आसानी से रद्द हो सकता है।
किन वीजा पर बड़ा असर
यह नियम सभी प्रकार के वीजा पर लागू होगा, चाहे कोई पत्रकार हो, घूमने जा रहा हो या नौकरी के लिए अप्लाई कर रहा हो। लेकिन इन सबसे ज्यादा असर H-1B वीजा वाले लोगों पर पड़ सकता है, क्योंकि यह वीजा खास तौर पर टेक कंपनियों में काम करने वाले इंजीनियरों, विश्लेषकों और डिजिटल टीमों को मिलता है। इसमें भारतीय कर्मचारी बड़ी मात्रा में शामिल हैं।
मंडरा रहा परेशानी का बादल
विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि इस नियम से वे लोग भी प्रभावित होंगे जो इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, साइबर बुलिंग रोकने, नफरत फैलाने वाली भाषा की निगरानी करने और डिजिटल अपराधों से बचाने का काम करते हैं। इनका उद्देश्य लोगों की सुरक्षा करना होता है, लेकिन फिर सरकार उन्हें भी सेंसरशिप से जुड़ा काम मान सकती है और उनका वीजा भी परेशानी में आ सकता है।
(Trump Working Visa Rules) ट्रंप प्रशासन का क्या है कहना
ट्रंप सरकार का कहना है कि वह यह कदम अमेरिका के नागरिकों की अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के लिए उठा रही है। उनका दावा है कि ऐसे लोगों को वीजा नहीं देना चाहिए जो अमेरिका आकर सोशल मीडिया पर अमेरिका की आवाजों को दबा सकें। दूसरी तरफ, टेक विशेषज्ञ इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रस्ट एंड सेफ्टी टीमें सेंसरशिप नहीं, बल्कि ऑनलाइन दुनिया को सुरक्षित बनाने का काम करती हैं।





