सीजी भास्कर, 14 दिसंबर। महाराष्ट्र विधानसभा में उस वक्त माहौल गंभीर हो गया, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis Assembly Speech) को स्पष्ट शब्दों में कहना पड़ा कि मुंबई को महाराष्ट्र से कभी अलग नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर किसी तरह का भ्रम नहीं रहना चाहिए और बार-बार इस तरह की चर्चाएं केवल चुनावी मौसम में हवा दी जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि महाराष्ट्र कोई साधारण राज्य नहीं है, बल्कि 106 शहीदों के बलिदान से बना एक एकजुट प्रदेश है। उन्होंने दो टूक कहा, “मुंबई कल भी महाराष्ट्र (Devendra Fadnavis Assembly Speech) का था, आज भी है और जब तक सूरज-चांद रहेंगे, मुंबई महाराष्ट्र का ही हिस्सा रहेगा।” उनके इस बयान को हाल के राजनीतिक विमर्श और सोशल चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां मुंबई की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।
शिवाजी महाराज और संविधान का संदर्भ
देवेंद्र फडणवीस ने अपने संबोधन में छत्रपति शिवाजी महाराज और भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र हमेशा शिवाजी महाराज के दिखाए मार्ग और संविधान की मूल भावना पर चलता रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पहले राष्ट्रीय स्तर पर शिवाजी महाराज और मराठा साम्राज्य को लेकर कई गलतफहमियां थीं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय CBSE की किताबों में मराठा साम्राज्य और हिंदवी स्वराज्य पर सिर्फ एक पैराग्राफ होता था, जबकि मुगलों के इतिहास को 17 पन्नों में पढ़ाया जाता (Devendra Fadnavis Assembly Speech) था। अब यह स्थिति बदली है और नए सिलेबस में छत्रपति शिवाजी महाराज व मराठा साम्राज्य का 21 पन्नों का विस्तृत इतिहास शामिल किया गया है।
अर्थव्यवस्था पर भी दिया जवाब
सीएम फडणवीस ने विपक्ष के आर्थिक सवालों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य का खजाना भले ही असीमित न हो, लेकिन महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था देश के बड़े राज्यों में हर पैमाने पर मजबूत है। उन्होंने बताया कि RBI ने राज्य को अपने सकल घरेलू उत्पाद के 25 प्रतिशत तक ऋण लेने की अनुमति दी है, जबकि महाराष्ट्र इस सीमा से काफी नीचे है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, ‘लाडकी बहिन’ जैसी सामाजिक योजनाओं और किसानों को दी जा रही सहायता के बावजूद राज्य ने राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत के भीतर बनाए रखा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार की अपेक्षाओं से अधिक पूंजीगत निवेश महाराष्ट्र में किया गया है और विदेशी निवेश के मामले में राज्य देश में पहले स्थान पर है।
क्यों अहम है यह बयान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुंबई को लेकर समय-समय पर उठने वाली चर्चाओं और अफवाहों को देखते हुए मुख्यमंत्री का यह बयान सिर्फ एक जवाब नहीं, बल्कि राजनीतिक और संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश भी है। खासकर ऐसे समय में, जब चुनावी माहौल में भावनात्मक मुद्दों को हवा देने की कोशिशें तेज हो जाती हैं।




