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Supreme Court Verdict India : संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत: नियमितीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर, वर्षों की कानूनी लड़ाई का हुआ अंत

By Newsdesk Admin
07/01/2026
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Supreme Court Verdict India
Supreme Court Verdict India

सीजी भास्कर, 07 जनवरी। छत्तीसगढ़ के संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबी कानूनी जंग के बाद अब उनकी नियमित सेवा पर अंतिम न्यायिक मुहर लग (Supreme Court Verdict India) गई है। Supreme Court of India ने विश्वविद्यालय की ओर से दायर क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया है, जिससे कर्मचारियों के पक्ष में आए सभी पूर्व आदेश पूरी तरह से कायम हो गए हैं।

Contents
  • केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद बदली स्थिति
  • हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लंबी लड़ाई
  • रिव्यू और क्यूरेटिव पिटीशन भी खारिज
  • संविदा कर्मचारियों के लिए मिसाल

यह मामला Guru Ghasidas Central University में कार्यरत 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्हें छत्तीसगढ़ राज्य शासन के 5 मार्च 2008 के नियमितीकरण आदेश के आधार पर 26 अगस्त 2008 को नियमित किया गया था।

केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद बदली स्थिति

15 जनवरी 2009 को गुरु घासीदास विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। इसके साथ ही सभी 109 कर्मचारी नियमित कर्मी के रूप में विश्वविद्यालय का हिस्सा (Supreme Court Verdict India) बन गए। कर्मचारियों ने नियमितीकरण आदेश के तहत काम शुरू किया और 31 मार्च 2009 तक 8,209 रुपये वेतन भी प्राप्त किया।

इसके बाद बिना किसी पूर्व सूचना के उनका वेतन वापस ले लिया गया और अप्रैल 2009 से कलेक्टर दर पर भुगतान किया जाने लगा। इस फैसले को कर्मचारियों ने न्यायालय में चुनौती दी।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लंबी लड़ाई

कर्मचारियों ने इस कार्रवाई के खिलाफ Chhattisgarh High Court में रिट याचिकाएं दायर कीं। इसी बीच विश्वविद्यालय ने 19 फरवरी 2010 को नियमितीकरण को पूर्व प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी कर दिया, जिसे भी अदालत में चुनौती दी गई।

6 मार्च 2023 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि 19 फरवरी 2010 का आदेश विधिसंगत नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी याचिकाकर्ता नियमित कर्मचारी माने जाएंगे और उन्हें 26 अगस्त 2008 के आदेश के अनुसार सभी सेवा लाभ मिलेंगे।

इस फैसले के खिलाफ दायर रिट अपीलें 21 जून 2023 को खंडपीठ ने खारिज कर दीं। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी (सिविल) भी 15 मई 2024 को खारिज कर दी गई।

रिव्यू और क्यूरेटिव पिटीशन भी खारिज

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद जब विश्वविद्यालय ने अनुपालन (Supreme Court Verdict India) नहीं किया, तो कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दायर की। इस पर कुलपति, कुलसचिव और एमएचआरडी के सचिव को नोटिस जारी किया गया।

इसके बाद विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। अंततः दायर की गई क्यूरेटिव पिटीशन को भी सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। इसके साथ ही कर्मचारियों की नियमित सेवा पर अंतिम और निर्णायक मुहर लग गई है।

संविदा कर्मचारियों के लिए मिसाल

इस फैसले को संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के अधिकारों की दिशा में बड़ी मिसाल माना जा रहा है। वर्षों तक चली न्यायिक लड़ाई के बाद कर्मचारियों को न सिर्फ नियमित सेवा का अधिकार मिला है, बल्कि यह निर्णय देशभर के समान मामलों में भी एक मजबूत आधार बन सकता है।

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