सीजी भास्कर, 18 सितंबर। गणेश उत्सव के दौरान कई लोग घर में गणपति की स्थापना करने के बाद 1, 3, 5, 7 या 10 दिन में विसर्जन (Ganesh Chaturthi) करते हैं। इस साल गणेश उत्सव 14 सितंबर 2026 से शुरू हुआ है और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ समापन होगा। अगर आप घर पर ही बप्पा का विसर्जन करने की तैयारी कर रहे हैं, तो कुछ आसान तरीकों के साथ जरूरी सावधानियां भी ध्यान में रखनी चाहिए।
विसर्जन से पहले अंतिम पूजा, आरती और भोग की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद गणपति की मूर्ति को सम्मानपूर्वक विसर्जित किया जाता है। घर पर विसर्जन के लिए प्राकृतिक मिट्टी से बनी पर्यावरण अनुकूल मूर्ति का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प माना जाता है।

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अंतिम पूजा और भोग लगाएं
विसर्जन से पहले गणपति जी की विधि-विधान से पूजा करें। बप्पा को मोदक, फल या मिठाई का भोग लगाएं। साथ ही दूर्वा, अक्षत और फूल अर्पित करें। परिवार के साथ आरती करने के बाद पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगें और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करें।
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टब या बाल्टी में कर सकते हैं विसर्जन
घर पर विसर्जन के लिए साफ और पर्याप्त बड़े टब या बाल्टी में पानी भरें। चाहें तो इसमें थोड़ा गंगाजल भी मिला सकते हैं। पात्र के आसपास फूल और दीपक रखकर पूजा की जा सकती है।
मूर्ति पर चढ़ाए गए फूल, माला और सजावटी सामान को सावधानी से अलग करें। इसके बाद गणपति जी को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं और गणपति बप्पा मोरया का जयकारा लगाते हुए धीरे से पानी में रखें।
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मिट्टी को गमले में डाल सकते हैं
मूर्ति के पानी में घुलने के बाद बची प्राकृतिक मिट्टी और पानी को किसी गमले या पौधे में इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रखें कि इसे ऐसी जगह न रखें, जहां किसी के पैर लगें।
विसर्जन की मिट्टी को तुलसी के गमले में डालने से बचें। वहीं फूल, सजावटी सामान और अन्य पूजन सामग्री को अलग कर उचित तरीके से रखें या निपटाएं।
इस तरह घर पर गणपति विसर्जन श्रद्धा के साथ करने के साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा सकता है।
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