सीजी भास्कर 25 फ़रवरी छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सीएसआर फंड के इस्तेमाल को लेकर माहौल गरमा गया। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप ने जांजगीर जिले का हवाला देते हुए कहा कि सीएसआर राशि के वितरण में पारदर्शिता नहीं है, जनप्रतिनिधियों की अनुशंसाएं किनारे रख दी जाती हैं और कलेक्टर स्तर पर मनमानी के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। उनके मुताबिक (CSR Fund Bias in Chhattisgarh) अब केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जवाबदेही का सवाल बन चुका है।
मंत्री लखनलाल देवांगन का रुख, ‘समिति नहीं, प्रस्ताव मौजूद’
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि सीएसआर को लेकर कोई औपचारिक समिति नहीं है और फंड का उपयोग गांवों में विकास कार्यों के लिए किया जा सकता है। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि विपक्ष की ओर से प्रस्ताव आए हैं, जिन पर विचार की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, मंत्री के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं दिखा और (CSR Fund Bias in Chhattisgarh) को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग तेज होती गई।
‘घोषणा कर दीजिए’—विधायकों का दबाव, निर्देशों पर असमंजस
कांग्रेस विधायकों ने मंत्री से सीधे तौर पर मांग की कि वे प्रस्तावों पर सार्वजनिक घोषणा करें और कलेक्टर को कार्यों के लिए निर्देशित करें। जवाब में मंत्री ने कहा कि घोषणा करने का अधिकार उनके पास नहीं है। इसी बिंदु पर सदन में असहज चुप्पी छा गई—क्योंकि सवाल यही उठा कि यदि विभागीय मंत्री ही दिशा नहीं दे सकते, तो (CSR Fund Bias in Chhattisgarh) जैसे मामलों में जवाबदेही आखिर किसकी होगी?
भूपेश बघेल का तंज—‘निर्देश नहीं दे सकते तो मंत्री क्यों?’
मंत्री के जवाब पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जब कलेक्टर को निर्देशित करने का अधिकार नहीं है, तो मंत्री पद का औचित्य क्या रह जाता है। उनके इस बयान के बाद सदन में राजनीतिक तल्खी और बढ़ गई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सीएसआर फंड का इस्तेमाल स्थानीय जरूरतों के मुताबिक नहीं, बल्कि पसंद-नापसंद के आधार पर हो रहा है—और (CSR Fund Bias in Chhattisgarh) का मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाएगा।






