सीजी भास्कर, 28 फरवरी। शहर की बढ़ती ट्रैफिक समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 32 किलोमीटर लंबी ‘बिलासपुर रिंग रोड’ परियोजना को सैद्धांतिक सहमति (NHAI Feasibility Study) दे दी है। यह जानकारी बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को भेजे गए पत्र के माध्यम से दी गई है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि परियोजना की उपयोगिता और बिलासपुर की भविष्य की प्रशासनिक एवं औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) तैयार करने की अनुशंसा की गई है।
कहां से कहां तक बनेगी रिंग रोड?
प्रस्तावित रिंग रोड लगभग 32 किलोमीटर लंबी होगी, जो बोदरी (छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समीप) से शुरू होकर सेंदरी गांव (NH-130) तक (NHAI Feasibility Study) जाएगी। यह मार्ग बिलासपुर हाईकोर्ट और हवाई अड्डे को कोरबा, कटघोरा और सीपत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से सीधे जोड़ेगा।
शहर के बीच से हटेंगे भारी वाहन
फिलहाल NH-49 और NH-130 से गुजरने वाले भारी वाहनों का दबाव शहर के मुख्य बाजारों और रिहायशी इलाकों पर पड़ता है। रिंग रोड बनने के बाद इन वाहनों को बायपास मार्ग मिलेगा, जिससे ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। नागरिकों को रोजमर्रा की आवाजाही में राहत मिलेगी।
औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब को मिलेगा बढ़ावा
यह रिंग रोड सिरगिट्टी और लालखदान जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को NH-130A (रायपुर-धनबाद एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर) से जोड़ेगी। इससे माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आएगी।
बिलासपुर SECR (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे) और SECL का मुख्यालय होने के कारण यहां ट्रांसपोर्ट नगर और लॉजिस्टिक पार्क के विकास की संभावनाएं और मजबूत होंगी। परियोजना को क्षेत्रीय आर्थिक गलियारे के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम बन सकता है।
नियोजित शहरी विकास की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना बिलासपुर के सुनियोजित विस्तार में अहम भूमिका निभाएगी। शहर की बढ़ती आबादी, प्रशासनिक महत्व और औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए रिंग रोड लंबे समय से जरूरी मानी जा रही थी।
अब DPR और व्यवहार्यता अध्ययन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी और बजट आवंटन की दिशा में आगे (NHAI Feasibility Study) बढ़ाया जाएगा। यदि सब कुछ तय समय पर हुआ तो आने वाले वर्षों में बिलासपुर की ट्रैफिक तस्वीर बदल सकती है।






